338 अभ्यर्थियों पर राजस्थान कर्मचारी बोर्ड ने लगाया आजीवन प्रतिबंध

जयपुर/एजेंसी। प्रतियोगिता परीक्षाओं में नकल या अन्य तरीके से फर्जीवाड़ा करने वाले अभ्यर्थियों के खिलाफ राजस्थान कर्मचारी बोर्ड ने सख्त कार्रवाई की है। बोर्ड ने 338 अभ्यर्थियों को बोर्ड की परीक्षाओं में शामिल होने पर आजीवन प्रतिबंध लगा दिया है। बोर्ड की ओर से राजस्थान सरकार के विभिन्न विभागों में हर साल हजारों कर्मचारियों और अधिकारियों की भर्ती की जाती है। भर्ती के दौरान अनुचित साधनों का प्रयोग करने वालों के खिलाफ बोर्ड ने सख्त कदम उठाया है। बुधवार 10 अप्रैल को बोर्ड ने 338 अभ्यर्थियों को डिबार (निषेध) कर दिया है। यानी ये अभ्यर्थी अब कभी भी बोर्ड की परीक्षाओं में शामिल नहीं हो सकेंगे।
बोर्ड के अध्यक्ष आलोक राज का कहना है कि बोर्ड स्वच्छ और पारदर्शी तरीके से भर्ती परीक्षाओं का आयोजन करने के लिए प्रतिबद्ध है। सरकारी नौकरियों के लिए योग्य और ईमानदार युवाओं का चयन करना बोर्ड का कर्तव्य है। मेहनत करने वाले युवाओं को उनकी क्षमता के अनुसार नौकरी मिले, इसके लिए अनुचित साधनों का उपयोग करने वालों पर समय समय पर प्रतिबंध लगाया जाता रहा है। पिछले एक साल में 1000 हजार से ज्यादा अभ्यर्थियों पर आजीवन प्रतिबंध लगाया जा चुका है। नकल, पेपर लीक, फर्जी डिग्रियां इत्यादि किसी भी तरह के अनुचित साधनों का प्रयोग करने वाले अभ्यर्थियों के साथ बोर्ड की कोई हमदर्दी नहीं है। ऐसे अभ्यर्थियों को बोर्ड की परीक्षाओं में शामिल करने का मौका नहीं दिया जाएगा।
बोर्ड के अनुसार पिछले दिनों आयोजित विभिन्न भर्ती परीक्षाओं के दौरान 338 अभ्यर्थियों के खिलाफ नकल और फर्जीवाड़ा करने की शिकायतें प्राप्त हुई थी। बोर्ड ने इन शिकायतों को गहनता से सत्यापन कराया। इनमें 240 अभ्यर्थी ऐसे थे जिन्होंने फर्जी डिग्रियां जमा करा कर नौकरी हासिल करने का प्रयास किया था। 92 अभ्यर्थी ऐसे थे जिन्होंने लिखित परीक्षा के दौरान नकल की थी और 6 अभ्यर्थियों ने डमी अभ्यर्थी बैठाकर परीक्षा पास की थी। इन सभी अभ्यर्थियों के खिलाफ सख्त एक्शन लिया गया है। ये 338 अभ्यर्थी भविष्य में बोर्ड की किसी भी परीक्षा में शामिल नहीं हो सकेंगे।
पिछले दिनों आयोजित पीटीआई (शारीरिक शिक्षक) भर्ती के दौरान भी कई अभ्यर्थियों के खिलाफ शिकायतें प्राप्त हुई है। दस्तावेज जांच के दौरान पता चला है कि कुछ अभ्यर्थियों ने फर्जी स्पोर्ट्स सर्टिफिकेट जमा कराए हैं। जांच के दौरान 14 अभ्यर्थियों के दस्तावेज संदिग्ध पाए गए हैं। इन चयनित शारीरिक शिक्षकों को नोटिस भेजे गए हैं। 29 अप्रैल तक अपना पक्ष रखने का मौका दिया गया है। 29 अप्रैल तक संतोषजनक जवाब नहीं मिला तो बोर्ड इन 14 अभ्यर्थियों पर भी प्रतिबंध लगाने के साथ कानून कार्रवाई करेगा।

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