ओडिशा ट्रेन हादसा: जीवित पति की मौत का महिला ने किया नाटक, फर्जी दस्तावेज के जरिए लेना चाहती थी मुआवजा

नेशनल डेस्क। कटक जिले की एक महिला ने ओडिशा ट्रेन त्रासदी के पीड़ितों के लिए घोषित मुआवजे पर दावा करने के लिए फर्जी दस्तावेज पेश कर अपने जीवित पति को ‘मृत’ बताने की कोशिश की। मामला तब सामने आया जब महिला के पति विजय दत्त ने खुद इस संबंध में मणिबांधा थाने में लिखित शिकायत दर्ज करायी। महिला की पहचान कटक जिले के बडंबा थाना क्षेत्र के मणिबंधा इलाके की रहने वाली गीतांजलि दत्ता के रूप में हुई है। उसने दावा किया था कि उसके पति बिजय दत्ता की ट्रेन हादसे में मौत हो गई है।
बताया जा रहा है कि महिला शहर के एक अस्पताल में पहुंची थी जहां पहचान के लिए शव रखे गए थे। महिला ने बालासोर में एनओसीसीआई क्षेत्र के एक यात्री का फर्जी आधार कार्ड दिखाया और दावा किया कि ट्रेन दुर्घटना में उसके पति की मृत्यु हो गई। हालांकि, पुलिस ने सत्यापन के दौरान मुआवजा राशि हड़पने की उसकी कोशिश का पर्दाफाश कर दिया। जांच के दौरान पाया गया कि महिला ने अनुग्रह राशि हड़पने के लिए फर्जी दस्तावेज पेश किए। महिला के पति ने कहा कि मुझे शर्म आती है। मैं सभी से इस प्रकार की महिलाओं से सुरक्षित रहने का अनुरोध करता हूं। मैंने पुलिस में मामला दर्ज कराया है और मुझे न्याय चाहिए।
पुलिस ने बताया कि महिला को चेतावनी देकर छोड़ दिया गया, लेकिन महिला की मुश्किलें तब शुरू हुईं, जब उसके पति बिजय दत्ता ने मणियाबांदा थाने में इस मामले को लेकर शिकायत दर्ज करवाई। उन्होंने बताया कि महिला गिरफ्तारी की डर से फरार है। वह बीते 13 वर्ष से अपने पति से अलग रह रही थी। हालांकि, मणियाबंदा थाने के प्रभारी बसंत कुमार सत्पथी ने बताया कि पुलिस ने बिजय को बालासोर जिले के बहानागा थाने में शिकायत दर्ज कराने को कहा है, क्योंकि हादसा वहीं हुआ था। इस बीच, मुख्य सचिव पीके जेना ने रेलवे और ओडिशा पुलिस से शवों पर फर्जी दावा करने वाले लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने को कहा है।
मृतकों के परिजनों को मिल रहा मुआवजा
गौरतलब है कि रेल हादसे में मारे गये लोगों के परिजनों के लिए ओडिशा के मुख्यमंत्री ने पांच लाख रुपये, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने दो लाख रुपये और रेल मंत्रालय ने दस लाख रुपये की अनुग्रह राशि का ऐलान किया था। ओडिशा के बालासोर में दो जून को दो यात्री ट्रेन और एक मालगाड़ी के दुर्घटनाग्रस्त होने से कुल 288 लोगों की जान चली गई थी और 1,200 से अधिक लोग घायल हो गये थे।

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