अयोध्‍या में खंडहर हो चुकी नवाब शुजाउद्दौला की हवेली की बदलेगी सूरत, पर्यटन विभाग ने शुरू की मरम्‍मत

अयोध्‍या,(उत्तर प्रदेश)। अयोध्‍या में कभी नवाब शुजाउद्दौला की हवेली रही अफीम कोठी का जीर्णोद्धार कर इसकी पहचान वापस लाई जा रही है। यह परिक्रमा मार्ग के किनारे खवासपुरा इलाके में स्थित है। नवाब की हवेली को ब्रिटिश काल में अफीम का दफ्तर बना कर इसका नाम अफीम कोठी रख दिया गया था। यहां पर बाराबंकी सहित मंडल के कई जिलों में अफीम के रोजगार का संचालन किया जाता था।
इस समय यह प्राचीन हवेली जर्जर हालत में हाल में थी जिस पर पर्यटन विभाग ने जीर्णोद्धार का प्रॉजेक्ट बना कर शासन को भेजा। अब इसे स्वीकृत कर फंड भी रिलीज हो गया है। फिलहाल, इसका निर्माण कार्य भी शुरू हो गया है। डीएम नितीश कुमार ने बताया कि इस कोठी को महत्वपूर्ण पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जा रहा है। कोशिश रहेगी इसकी प्राचीनता इसमें दिखाई दे। इसे देख कर लोग नवाबी काल को याद करें।
उन्होंने बताया कि जीर्णोद्धार के बाद इसे म्यूजियम बनाया जाएगा। इसमें समय के साथ हुए परिवर्तन, इसके इतिहास से जुड़ी वस्तुओं और साहित्य को संजोया जाएगा। बताया गया कि जहां अयोध्या में 37मंदिरों को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जा रहा है। वहीं नवाबी काल की धरोहरों का भी जीर्णोद्धार कर संजोए रखने की योजना पर काम किया जा रहा है। सोमवार को डीएम ने अफीम कोठी पर चल रहे निर्माण कार्यों का निरीक्षण कर गुणवत्ता के साथ निर्माण करवाने के लिए आवश्यक निर्देश भी दिए।
अवध के पुरातात्विक महत्व की इमारतों को संरक्षित रखने के लिए संघर्षरत सजपा के प्रदेश अध्यक्ष अशोक श्रीवास्तव का कहना है कि अफीम कोठी को यहां के नवाब शुजाउद्दौला ने अपने महल और दीवाने खास के लिए बनवाया था। यह हवेली पुरातत्व विभाग की संरक्षित इमारतों में है। ऐसे में इसकी पहचान के साथ खिलवाड़ नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि कायदे से पुरातत्व विभाग को इसका संरक्षण करना चाहिए था। श्रीवास्तव के मुताबिक अंग्रेजों ने 1857के गदर के बाद नवाब शुजाउद्दौला को अपमानित करने के उनकी हवेली पर कब्जा कर उसे अफीम कोठी नाम दे दिया था।

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