परशुराम-लक्ष्मण सवाद और राम वनवास की लीला का मंचन किया गया

साहिबाबाद/गाजियाबाद। रामायण कला संगम सिमिति लाजपत नगर के द्वारा रामायण मंचन में राम वनवास व परशुराम-लक्ष्मण सवाद का मंचन किया गया। रामायण महाकाव्य सनातन धर्म का एक प्रमुख ग्रंथ है। जिसे अगर धार्मिक, पौराणिक, ऐतिहासिक और दार्शनिक ग्रंथ कहा जाए तो यह गलत नहीं होगा। रामायण के हर पन्ने पर अनेक रहस्य और रोमांच छुपा है। रामायण की सबसे बड़ी घटना भगवान राम का वनवास जाना है। रामायण कला संगम सिमिति लाजपत नगर के कलाकारों में पूरण प्रकाश ने राजा दशरथ, माता कैकेयी सशी शर्मा, श्री राम कपिल देव शर्मा, माता सीता शिवानी शर्मा, लक्ष्मण विरेंद शर्मा, व्यास जी जय प्रकाश शर्मा, और भगवन श्री परशुराम का प्रेम चंद शर्मा ने रोल निभाया, रामायण कला संगम समिति के अध्यक्ष श्री बिक्रम सिंह बैंसला व मीडिया प्रभारी मोहित शर्मा ने जानकारी देते हुवे बताया कि बुधवार को भगवान श्री राम ने सीता स्वयंवर में धनुष को तोड़ दिया था जिसके बाद राजा दशरथ ने माता सीता और भगवान श्री राम का विवाह करा दिया था। तभी क्रोधित होकर भगवान परशुराम विवाह स्थल में पहुँच जाते है और परशुराम-लक्ष्मण सवाद हो जाता है | बृहस्पतिवार को रामलीला मंचन में कैकेयी ने महाराज दशरथ से भगवान राम के लिए 14 वर्षों के लिए वनवास मांगा था, जिसकी वजह से रावण का अंत हो सका। कैकेयी ने राम के लिए पूरे जीवन के बजाए केवल 14 वर्षों का वनवास मांगा। विवाह से पहले कैकेयी महर्षि दुर्वासा की सेवा किया करती थीं। कैकेयी की सेवा से प्रसन्न होकर महर्षि दुर्वास ने कैकेयी का एक हाथ बज्र का बना दिया और आशीर्वाद दिया कि भविष्य में भगवान तुम्हारी गोद में खेलेंगे। समय का पहिया चलता रहा और कैकेयी का विवाह राजा दशरथ से हो गया था , कैकेयी ने चौहद वर्ष का वनवास मांगकर यह समझाया कि अगर व्यक्ति युवावस्था में चौदह यानी पांच ज्ञानेन्द्रियाँ (कान, नाक, आंख, जीभ, त्वचा) पांच कर्मेन्द्रियां (वाक्, पाणी, पाद, पायु, उपस्थ) तथा मन, बुद्धि, चित और अहंकार को वनवास (एकान्त आत्मा के वश) में रखेगा तभी अपने अंदर के घमंड और रावण को मार पाएगा। दूसरी बात यह थी कि रावण की आयु में केवल 14 ही वर्ष शेष थी। सरस्वती ने मंथरा की मति में अपनी योजना डाल दी, उसने कैकयी को वही सब सुनाया, समझाया और कहने को उकसाया जो सरस्वती को करवाना चाहती थीं। रामलीला मंचन में मौजूद नीटू सिंह, वरिष्ठ उपाध्यक्ष पुष्कर गुप्ता, अनिल सिरोही, सालिकराम सिंह, अभिमन्यु मिश्रा, पंकज गोयल, टैंक बहादुर (टिंकू), सुरेश कसाना, बी.एल. गोस्वामी, बिजेंद्र सिंह मास्टर जी, के.के. सिंह, कमल पाटिल वार्ड अध्यक्ष, चेतन ठाकुर, विनोद बालियान, आशीष पंडित, विनय कुमार, आशीष जैन, आदि मौजूद रहे।

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