जेल के रूटीन की आदत, बाहर कैसे रहूंगा? 30 साल बाद रिहा हुए 104 साल के रसिक टेंशन में

How will I live outside, I am used to the routine of jail? 104 year old Rasik released after 30 years is in tension

  • भाई की हत्या करने के मामले में हुई थी जेल
  • 30 सालों तक जेल में रहे बंद, अब हुए रिहा
  • 104 साल की उम्र में रसिक निकले जेल से बाहर

मालदा/पश्चिम बंगाल। पिछले सप्ताह सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद 104 वर्षीय रसिक चंद्र मंडल मंगलवार को मालदा जेल से बाहर आ गए। मंडल ने जेल के बाहर कदम रखा तो वह झिझके। उनके लिए सब अजीब सा था। वह बाहर की दुनिया में आने से डर रहे थे। ऐसा हो भी क्यों न, आखिर तीन दशक के बाद उन्होंने जेल के बाहर की दुनिया देखी थी। जिंदगी के ये 30 साल उनके लिए अजीब गुजरे।कई साल पहले रसिक का उनके भाई सुरेश मंडल के साथ झगड़ा हो गया था। यह विवाद रसिक की अपनी उपजाऊ जमीन के एक बड़े हिस्से को लेकर हुआ था। नवंबर 1988 में रसिक ने सुरेश की उनके घर में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।
उनकी विधवा की शिकायत के आधार पर पुलिस ने रसिक सहित कुछ ग्रामीणों को गिरफ्तार किया था। 1994 में एक ट्रायल कोर्ट ने रसिक और एक स्थानीय निवासी जितेन मंडल को दोषी पाया और उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई। गिरफ्तारी के समय रसिक की उम्र 68 वर्ष थी। कुछ साल पहले रसिक और जितेन पैरोल पर घर आए थे। इस दौरान जितेन की मौत हो गई और रसिक वापस जेल में आ गया। इसके बाद रसिक ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
अब सेवानिवृत्त हो चुके न्यायमूर्ति ए अब्दुल नजीर और अब सीजेआई संजीव खन्ना की पीठ ने 7 मई, 2021 को बंगाल सरकार को नोटिस जारी किया। इस नोटिस में सुधार गृह के अधीक्षक से मंडल की शारीरिक स्थिति और स्वास्थ्य के बारे में स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने को कहा। राज्य द्वारा सुप्रीम कोर्ट को यह बताए जाने के बाद कि रसिक मानसिक रूप से चुस्त और तंदुरुस्त है, सीजेआई खन्ना और न्यायमूर्ति संजय कुमार की सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने उसे 29 नवंबर को जमानत पर रिहा कर दिया। जमानत के कागजात मंगलवार को मालदा सुधार गृह पहुंच गए।
अपने बेटे उत्तम का हाथ थामे जेल से बाहर आते हुए रसिक ने कहा, ‘मैं घर जाकर खुश हूं, लेकिन मुझे जेल की याद आएगी।’ उन्होंने कहा कि उन्होंने अन्य कैदियों के साथ शांतिपूर्ण जीवन जिया है जो उनके विस्तारित परिवार की तरह थे। उन्हें जेल के दैनिक दिनचर्या की आदत हो गई थी।’

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