कानपुर में खाकी की धौंस पर बिना टिकट शताब्दी एक्सप्रेस का सफर, रेलवे अफसरों ने सिपाहियों से वसूला तगड़ा जुर्माना
In Kanpur, a person was forced to travel in Shatabdi Express without ticket due to the pressure of the police, railway officials collected a hefty fine from the constables

कानपुर/उत्तर प्रदेश। उत्तर प्रदेश पुलिस की बात किए जाए तो अधिकतर देखा गया है कि पुलिस कर्मी वर्दी की धौंस दिखाकर रेलवे का शानदार सफर करते हैं। लेकिन स्वर्ण शताब्दी-शताब्दी एक्सप्रेस में बिना टिकट सफर करना मंहगा पड़ गया। रेलवे अधिकारियों के सामने वर्दी की ठसक भी नहीं चली, जुर्माना भरकर विधिक कार्रवाई से बचना पड़ा। दोनों सिपाहियों से 4460 रूपए का जुर्माना वसूला गया।
लखनऊ से दिल्ली जाने वाली स्वर्ण शताब्दी एक्सप्रेस के सी-01 कोच शुक्रवार को लखनऊ से सादे कपड़ों में सिपाही वीरेश चढ़ गए। ट्रेन सुपरिटेंडेंट दिवाकर तिवारी ने टिकट मांगा, तो सिपाही वर्दी की धौंस दिखाने लगा। इस दौरान सिपाही वीरेश और रेलवे अधिकारी के बीच टिकट को लेकर कहासुनी होने लगी। जब आरपीएफ के एसआई और सिपाही पहुंचे तो उन्हें ही देख लेने की धमको देने लगा।
ट्रेन सुपरिटेंडेंट दिवाकर तिवारी ने मेमो दिया, इसके बाद आरपीएफ ने उसे सेंट्रल स्टेशन पर उतार लिया और थाने ले गए। ठसक भारी पड़ते देख सिपाही ने यू टर्न लिया, और 2230 रूपए जुर्माना भर कर जान छुड़ाई। इसकी तरह से शताब्दी एक्सप्रेस कानपुर सेंट्रल स्टेशन से पौने पांच बजे चली। इसी दौरान सी-7 कोच की तीन नंबर सीट पर धर्मेंद्र यादव नाम का सिपाही बैठ गया। कोच कंडेक्टर अनिल कुमार ने सिपाही से टिकट मांगी, तो धर्मेंद्र वर्दी की रौब दिखाने लगा।
इसी बीच कोच कंडेक्टर जितेंद्र और सिपाही के बीच कहासुनी और विवाद शुरू हो गया। जितेंद्र ने कंट्रोल रूम को सूचना दी, इसके साथ ही सिपाही की अराजकता को लेकर एक्स पर पोस्ट किया। लेकिन तब तक ट्रेन फफूंद पहुंच चुकी थी। यहां जीआरपी ने उसे बचाने का प्रयास किया, लेकिन कंट्रोल रूम में सूचना होने के चलते आरपीएफ ने उसे पकड़ लिया। आरपीएफ सिपाही को पकड़ कर थाने लाई, उससे भी 2230 रूपए का जुर्माना भराया गया। इसके बाद उसे भी छोड़ दिया गया।




