सीलमपुर थाना पुलिस ने फर्जी अधिकारी बनकर घूम रहे एक युवक को किया गिरफ्तार

नई दिल्ली। खुद को पुलिस इंस्पेक्टर और आईईएस अधिकारी बताकर रौब झाड़ रहा युवक सीलमपुर पुलिस के हत्थे चढ़ गया। आरोपी अधिकारियों वाली सफेद रंग की मारुति सियाज कार में सवार था। उसने ट्रैफिक पुलिस कर्मियों को डराने-धमकाने की खूब कोशिश की, लेकिन कामयाब नहीं हो सका। बाद में उसे लोकल पुलिस के हवाले कर दिया गया। पुलिस ने आरोपी को बुधवार को कोर्ट में पेश किया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया। पकड़े गए आरोपी की पहचान अफजालपुर-पावटी, जानी, मेरठ निवासी रउफ अली के रूप में हुई है। सीलमपुर थाना पुलिस ने आरोपी के पास से एक सियाज कार, तीन फर्जी आईकार्ड और एक पुलिस की टोपी बरामद की है।
उत्तर-पूर्वी जिला के वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि दिल्ली ट्रैफिक पुलिस में तैनात एएसआई अरुण कुमार त्यागी सीलमपुर एरिया में धर्मपुरा लाल बत्ती के पास अपने टीआई के साथ ड्यूटी पर थे। इस बीच सुबह करीब 11.30 बजे उन्होंने देखा कि लाल बत्ती पर खड़ी सफेद रंग की सियाज गाड़ी स्टाप लाइन से आगे थी। वह चालक के पास पहुंचे और स्टाप लाइन नियम तोड़ने की बात कर लाइसेंस मांगा। इस पर चालक भड़क गया।
वह कहने लगा कि उसकी हिम्मत कैसे हुई लाइसेंस मांगने की, वह दिल्ली पुलिस में इंस्पेक्टर है। अरुण ने देखा कि कार के डैशबोर्ड पर एक पुलिस की टोपी व तीन आई कार्ड रखे थे। कुछ देर बाद आरोपी खुद को वित्त मंत्रालय का अधिकारी बताने लगा। उसने एक आईकार्ड भी अरुण को दे दिया। आईकार्ड पर विपिन गर्ग लिखा था। आरोपी ने खुद को कस्टम में अधिकारी बताया। अरुण ने आईकार्ड पर लिखे नंबर पर कॉल किया तो आरोपी का भेद खुल गया। वह नंबर किसी कस्टम अधिकारी का नहीं था।
भेद खुलने पर आरोपी खुद को आईईएस अधिकारी संजय गोयल बताकर रौब झाड़ने लगा। अरुण आरोपी को अपने टीआई के पास ले गया। टीआई ने उससे पूछताछ की तो आरोपी का भेद खुल गया। आरोपी ने अपना नाम रऊफ बताया। उसने बताया कि वह दिल्ली में जहांगीरपुरी में रहता है। वह यहां एक वर्कशॉप में नौकरी कर रहा है। भेद खुलने के बाद उसे पुलिस के हवाले कर दिया गया। अब पुलिस आरोपी से पूछताछ कर इस बात का पता लगाने का प्रयास कर रही है कि आरोपी किसकी कार लेकर आया था। उसने आईकार्ड कहां से प्राप्त किए और असल में वह इनका क्या करता था।




