दिल्ली हाईकोर्ट ने प्राचीन शिव मंदिर को तोड़ने के आदेश पर लगाई रोक

विजय लक्ष्मी पांडे,(दिल्ली ब्यूरो)। देश की राजधानी दिल्ली में दिल्ली सरकार द्वारा आईटीओ मेट्रो स्टेशन के पास बने एक प्राचीन शिव मंदिर को तोड़ने की साजिश की जा रही है। जिससे कि साफ होता है की सरकारें एक तरफ तो ईश्वर की भक्ति का ढोंग कर रही है और दूसरी और साजिश के तहत मंदिर तोड़ने का काम कर रही है। सरकार की यह मानसिकता साफ तौर पर इशारा कर रही है कि मौजूदा दिल्ली सरकार हिंदू विरोधी है। इसका एक उदाहरण हम पहले भी देख चुके हैं। दिल्ली में जहां एक तरफ मस्जिद के मौलानाओं को बाकायदा सरकारी सैलरी एवं अन्य सुविधाएं भी दी जा रही है वहीं दूसरी ओर मंदिरों को तोड़ने की साजिश की जा रही है। जो कि दिल्ली की केजरीवाल सरकार के हिंदू विरोधी मानसिकता को दर्शाता है। दिल्ली सरकार द्वारा आईटीओ मेट्रो स्टेशन के पास बने एक प्राचीन शिव मंदिर को तोड़ने का आदेश दिया गया है, इस आदेश में ऐसा भी कहा जा रहा है कि केंद्र सरकार की भी साझेदारी है क्योंकि पीडब्ल्यूडी दिल्ली सरकार और एलएनडी केंद्र सरकार के अधीनस्थ संस्थान हैं। परिपूर्ण न्यूज़ द्वारा मंदिर तोड़ने की खबर को प्रमुखता से उठाया गया था। जिसका असर यह हुआ कि फिलहाल दिल्ली हाईकोर्ट ने प्राचीन शिव मंदिर को तोड़ने के दिल्ली सरकार के आदेश पर रोक लगा दी है।

यह प्राचीन शिव मंदिर 1911 से छोटे से पेड़ के पास बना था, जिसका कांग्रेस के समय में कुछ लोगों के सहयोग विस्तार किया गया। जब मेट्रो का कार्य शुरू हुआ तो डीएमआरसी ने ही मंदिर को फिर से रिनोवेट करवाकर सुंदर भवन बनवाया। समय-समय पर मंदिर के रिनोवेशन का काम होता रहा यह मंदिर की लीगल जमीन है जिस पर सरकार या किसी सरकारी संस्था का कोई अधिकार नहीं है।परिपूर्ण न्यूज़ की दिल्ली ब्यूरो चीफ विजय लक्ष्मी पांडे ने जब इस संबंध में मंदिर कमेटी के प्रेसिडेंट दिल्ली हाई कोर्ट के एडवोकेट सुरेश बेरी जी से बात की उन्होंने बताया कि जैसे ही हमें मंदिर तोड़ने के आदेश की सूचना प्राप्त हुई वैसे ही हम ने कोर्ट में जनहित याचिका दायर की जिसमें सुनवाई के दौरान पीडब्ल्यूडी के अधिकारी भी मौजूद रहे। पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों का कहना है कि हमने मंदिर के साथ-साथ पास में बनी मस्जिद को भी नोटिस दिया था मगर इस नोटिस के सूचना की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हो पाई है। मंदिर कमेटी द्वारा देखा गया कि मस्जिद के पास जो थोड़ी जगह बढ़ाकर निर्माण किया गया था उसे उन्होंने तोड़कर अंदर कर दिया है। हेड से कुवैत सुरेश बेरी का कहना है कि पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों के साथ मंदिर कमेटी की बैठक हुई जहां पर मंदिर कमेटी द्वारा हाई कोर्ट के स्टे आर्डर को दिखाकर फिलहाल इस मामले को टाल दिया गया है मगर इस आदेश को स्थाई तौर पर स्थगित करने जैसी कोई सूचना नहीं है।

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