भारत को साइबर खतरों से निपटने के लिए इंजीनियरों की दक्षता बढ़ाने पर निवेश की जरूरत: विशेषज्ञ

अंतर्राष्ट्रीय डेस्क। प्रौद्योगिकी क्षेत्र के एक विशेषज्ञ ने सुझाव दिया है कि भारत सरकार को साइबर खतरों से निपटने के लिए अपने वार्षिक शिक्षा बजट का कम से कम 50 प्रतिशत इंजीनियरों की दक्षता बढ़ाने में निवेश करने की जरूरत है। जापानी कंपनी ट्रेंड माइक्रो में दक्षिण पूर्व एशिया और भारत के उपाध्यक्ष नीलेश जैन ने कहा, ‘‘पहली बात यह कि भारत को पूरे देश में साइबर सुरक्षा जागरूकता कार्यक्रम चलाने की आवश्यकता है, जिसमें सभी बड़े और छोटे उद्यमों, सरकारी विभागों और नागरिकों को शामिल किया जाए।’’

उन्होंने कहा कि भारत बहुत सारे इंजीनियर तैयार करता है, लेकिन उन्हें साइबर हमलों से निपटने के लिए गहनता से प्रशिक्षित नहीं किया जाता है। जैन ने कहा कि अब समय आ गया है कि ‘‘विशेषज्ञों के मामले में भारी निवेश किया जाए। खतरों से निपटने के लिए विश्वविद्यालयों को विशेषज्ञ तैयार करने चाहिए।’’ जैन ने शनिवार को पीटीआई से कहा, ‘‘भारत में विश्वविद्यालयों को अब साइबर सुरक्षा इंजीनियरों को तैयार करने पर ध्यान देना चाहिए क्योंकि धोखाधड़ी के मामले तेजी से और अर्थव्यवस्था के सभी क्षेत्रों में फैल रहे हैं।’’

भारत साइबर हमलों का सामना करने वाले शीर्ष 10 देशों में शामिल है। यह अमेरिका और कुछ पश्चिमी देशों के बाद बढ़ते रैंसमवेयर हमलों वाले शीर्ष पांच देशों में भी शामिल है। जैन ने कहा कि अभी परियोजनाओं पर काम करते हुए साइबर सुरक्षा सीखी जाती है, इसलिए कॉलेजों और विश्वविद्यालयों को साइबर सुरक्षा तथा रैंसमवेयरविशेषज्ञ तैयार करने चाहिए। उन्होंने कहा कि इन तेजी से फैल रहे ऑनलाइन खतरों से निपटने के साथ पहले ही खतरों का पता लगाने का माहौल बनाया जाना चाहिए, क्योंकि कई बार बहुत देर हो चुकी होती है।

विश्वस्तरीय प्रौद्योगिकी उद्योग में दो दशक से अधिक समय गुजार चुके अहमदाबाद निवासी जैन (43) ने कहा, ‘‘भारत के पास मानव संसाधन हैं। कड़ी मेहनत करने वाले छात्रों का एक बड़ा और लगातार बढ़ता हुआ समूह है, जिनकी दुनिया के साथ अंग्रेजी में संवाद करने की क्षमता उन्हें भविष्य में आने वाली उन्नत तकनीकों के लिए सही तकनीकीविद बनाती है।’’

उन्होंने इस बात की सराहना की कि डिजिटलीकरण पूरे देश में फैल गया है, यहां तक कि किसानों, या पान वाले की दुकान या किराना दुकान पर भी, ऑनलाइन भुगतान लिया जा रहा है तथा कुछ साधारण लोग, जो पर्याप्त रूप से साक्षर नहीं हैं, भी अपने मोबाइल फोन-आधारित ऐप पर काम कर रहे हैं। रैंसमवेयर एक तरह का मालवेयर होता है, जो किसी कंप्यूटर तक पहुंच हासिल कर लेता है और सभी फाइल को इन्क्रिप्टेड कर देता है। डेटा और पहुंच के एवज में सेंधमारों द्वारा फिरौती की मांग की जाती है।

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