त्रिपुरा में बांग्लादेश उच्चायोग बंद, बांग्लादेशी नागरिकों को इलाज और होटल में कमरा नहीं

Bangladesh High Commission in Tripura closed, Bangladeshi citizens not getting treatment and hotel rooms

  • अगरतला में बांग्लादेश सहायक उच्चायोग बंद
  • सुरक्षा कारणों से अपनी सभी सेवाएं उच्चायोग ने की बंद
  • त्रिपुरा के होटलों में बांग्लादेशियों को नहीं मिलेगा कमरा

अगरतला/एजेंसी। त्रिपुरा की राजधानी अगरतला स्थित बांग्लादेश सहायक उच्चायोग ने सुरक्षा कारणों से अपनी सभी सेवाएं अगले आदेश तक स्थगित कर दी हैं। उच्चायोग के एक अधिकारी ने कहा कि बांग्लादेश की ओर से यह घोषणा की गई है। बांग्लादेश में हिंदू संत चिन्मय कृष्ण दास की गिरफ्तारी का विरोध हो रहा है। इस दौरान लोगों के एक समूह अगरतला स्थित सहायक उच्चायोग में जबरन घुस गया। इस घटना के बाद किसी भी अनहोनी से बचने के लिए फिलहाल उच्चायोग ने दफ्तर बंद कर दिया है। इधर त्रिपुरा के होटल्स और हॉस्पिटल असोसिएशन ने ऐलान किया है कि वे किसी भी बांग्लादेशी को अटेंड नहीं करेंगे।इधर त्रिपुरा पुलिस ने मामले पर स्वतः संज्ञान लेते हुए प्राथमिकी दर्ज की है। घटना में कथित रूप से संलिप्तत सात लोगों को गिरफ्तार किया है। पश्चिमी त्रिपुरा जिले के पुलिस अधीक्षक किरण कुमार के. ने बताया कि कर्तव्य में लापरवाही बरतने के आरोप में चार पुलिसकर्मियों के खिलाफ भी कार्रवाई की गई है।
बांग्लादेश मिशन के प्रथम सचिव एम.डी. अल-अमीन ने कहा, ‘सुरक्षा स्थिति को देखते हुए अगरतला स्थित बांग्लादेश सहायक उच्चायोग की वीजा समेत सभी सेवाएं अगले आदेश तक निलंबित रहेंगी। यह तत्काल प्रभाव से लागू होगा।’ मुख्यमंत्री माणिक साहा ने घटना की निंदा करते हुए कहा, ‘विरोध रैली के दौरान युवाओं के एक समूह ने अगरतला में बांग्लादेश के सहायक उच्चायोग कार्यालय में घुसने की कोशिश की। मैं घटना की निंदा करता हूं। शांतिपूर्ण विरोध की अनुमति दी जा सकती है, लेकिन इस तरह का व्यवहार स्वीकार्य नहीं है।’
इससे संबंधित घटनाक्रम में ऑल त्रिपुरा होटल एंड रेस्टोरेंट ओनर्स असोसिएशन (एटीएचआरओए) ने भी बड़ा फैसला लिया है। उन्होंने कहा कि त्रिपुरा में होटल बांग्लादेशी मेहमानों को वहां भारतीय ध्वज के अपमान के कारण अपनी सेवाएं नहीं देंगे। एटीएचआरओए के महासचिव सैकत बंद्योपाध्याय ने कहा कि यह आपातकालीन बैठक में लिया गया है। असोसिएशन के महासचिव ने कहा, ‘हम एक धर्मनिरपेक्ष देश हैं और सभी धर्मों का सम्मान करते हैं। हमारे राष्ट्रीय ध्वज का अपमान किया गया है और अल्पसंख्यकों को बांग्लादेश में कट्टरपंथियों के एक वर्ग के उत्पीड़न का सामना करना पड़ रहा है। पहले भी ऐसी घटनाएं होती थीं, लेकिन अब यह सीमा पार कर गई है।’
इस बीच, असम सहित कई पूर्वोत्तर राज्यों में विरोध प्रदर्शन जारी रहा। सनातनी युवा के बैनर तले हजारों लोग अगरतला में एकत्र हुए और दास की तत्काल रिहाई की मांग करते हुए रैली निकाली। उन्होंने बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर हो रहे अत्याचारों का भी विरोध किया। हालांकि, प्रदर्शनकारियों को अंतरराष्ट्रीय सीमा पर अखौरा एकीकृत जांच चौकी (आईसीपी) की ओर बढ़ने की अनुमति नहीं दी गई क्योंकि पुलिस ने उन्हें बांग्लादेश मार्च आयोजित करने की अनुमति नहीं दी थी।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button