यूपी में महिलाओं की सुरक्षा का बुलडोजर मॉडल, 3 हजार पुलिस पिंक बूथ खुलेंगे

लखनऊ,(उत्तर प्रदेश)। उत्तर प्रदेश में बुलडोजर मॉडल काफी हिट रहा है। यूपी चुनाव के दौरान भी बुलडोजर मॉडल खासी चर्चा में रहा। अब कानून व्यवस्था से लेकर आंतरिक सुरक्षा के मसले पर कड़े फैसले लिए जा रहे हैं। यूपी में महिलाओं की सुरक्षा के लिए योगी सरकार बड़ा कदम उठाने जा रही है। महिला बीट प्रणाली को और मजबूत करने के लिए 10,417 स्कूटी खरीदी जाएंगी। साथ ही हर जिले में 40 यानी पूरे प्रदेश में करीब तीन हजार पुलिस पिंक बूथ खोले जाएंगे। सीएम योगी आदित्यनाथ ने गृह विभाग की उच्च स्तरीय बैठक में इस संबंध में निर्देश दिए हैं। इन पर पांच सौ करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। सीएम ने शत्रु संपत्तियों को अतिक्रमण से मुक्त करवाने के लिए प्रदेशव्यापी अभियान भी चलाने के निर्देश दिए हैं।

गृह विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, 20 बूथ धार्मिक और पर्यटन स्थलों पर खुलेंगे। ये बूथ मथुरा में कृष्ण जन्मभूमि, गोवर्धन मंदिर, वृंदावन बांके बिहार मंदिर और इस्कॉन मंदिर, वाराणसी में काशी विश्वनाथ धाम, बीएचयू, दुर्गा कुंड, संकट मोचन और सारनाथ, अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि स्थल, हनुमान गढ़ी और कनक भवन, प्रयागराज में अलोपी देवी मंदिर और बड़े हनुमान जी मंदिर, चित्रकूट में रामघाट और कामदगिरि, मीरजापुर में विंध्यवासिनी मंदिर, बलरामपुर में देवी पाटन मंदिर, आगरा में राधा स्वामी मंदिर और गोरखपुर में गोरखनाथ मंदिर में खोले जाएंगे। इन बूथों में महिलाओं के लिए रेस्ट रूम, वॉशरूम, शिकायत कक्ष और किचन से लेकर प्राथमिक चिकित्सा की व्यवस्था की जाएगी।

सीएम ने कुछ जिलों में शत्रु संपत्तियों पर अतिक्रमण पर भी सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने कहा कि सभी शत्रु संपत्तियों को अतिक्रमण से मुक्त करवाने के लिए प्रदेशव्यापी कार्रवाई शुरू की जाए। शत्रु संपत्ति की सुरक्षा, निगरानी व प्रबंधन के लिए प्रमुख सचिव स्तर के अधिकारी को नोडल अधिकारी के रूप में तैनात किया जाए।

सीएम ने यह भी कहा कि अंतरराज्यीय और अंतरराष्ट्रीय सीमा पर स्थित गांवों को ‘वाइब्रेंट’ बनाने के लिए नियोजित प्रयास हों। सीमावर्ती गांवों/जिलों की सांस्कृतिक-ऐतिहासिक विरासतों की बेहतर ब्रैंडिंग करें। स्कूली बच्चों, एनसीसी, एनएसएस के कैडेट, स्वयंसेवकों को इन क्षेत्रों का भ्रमण करवाया जाना चाहिए। यहां रह रहे रिटायर्ड सैनिकों और अर्धसैनिक बलों के जवानों को ‘सरहद के सिपाही’ के रूप में पहचान दी जाए और आवश्यकतानुसार सहयोग लिया जाए। क्रिमिनल प्रोसीजर (आइडेंटिफिकेशन) एक्ट के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए राज्य स्तर पर एक नोडल अधिकारी की तैनाती की जाए। हर हाल में यह सुनिश्चित करें कि एनसीआरबी के पास शुद्ध, वास्तविक और समयबद्ध आंकड़े उपलब्ध हों।

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