ग्राम पंचायत कादीपुर में मनाया गया काकोरी ट्रेन एक्शन शताब्दी महोत्सव
अमृत सरोवर से निकाली गई प्रभात फेरी

आजमगढ़/उत्तर प्रदेश। आजमगढ़ जिले के तहसील सगड़ी के ग्राम पंचायत कादीपुर में काकोरी ट्रेन एक्शन शताब्दी महोत्सव मनाया गया। इस अवसर पर कादीपुर ग्राम प्रधान के नेतृत्व में अमृत सरोवर से कंपोजिट विद्यालय कादीपुर (रजादेपुर) होते हुए स्कूली छात्र-छात्राओं एवं ग्राम वासियों के साथ प्रभात फेरी निकाली गई। विद्यालय के छात्र-छात्राओं द्वारा देश भक्ति नारों के साथ काकोरी ट्रेन एक्शन घटना के वीर क्रांतिकारियों के प्रति सम्मान प्रकट करते हुए बड़ी संख्या में शामिल होकर रैली को सफल बनाया। रैली के दौरान छात्र-छात्राओं एवं ग्राम वासियों ने देशभक्ति के नारे लगाए। प्रभात फेरी का समापन प्राचीन रजादेपुर मठ पर जाकर हुआ। इस अवसर पर रजादेपुर मठ के मठाधीश एवं भारती सर्वजन हिताय सेवा फाउंडेशन के संस्थापक व केंद्रीय अध्यक्ष महंत शिवसागर भारती ने कहा कि कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार की पहल पर काकोरी काण्ड का नाम बदलकर इसको काकोरी ट्रेन एक्शन की पहचान दी गई है और जन-जन को जागरूक करने के उद्देश्य से इसको शताब्दी महोत्सव के रूप में प्रदेश भर में मनाया जा रहा है। उन्होने कहा कि देश की स्वतंत्रता के लिए संसाधन जुटाने के प्रयास में काकोरी ट्रेन एक्शन हुआ जिसमें युवा क्रांतिकारियों ने अद्भुत साहस दिखाते हुए देश की आजादी के लिए धन इकट्ठा किया। युवाओं को इससे प्रेरणा लेते हुए क्रांतिकारियों के स्वपन के देश को बनाने में सहभागी बनना चाहिए। महंत शिवसागर भारती ने काकोरी ट्रेन एक्शन मे शहीदों का राष्ट्र के प्रति उनके त्याग को सर्वाेच्च बताया।
कादीपुर ग्राम प्रधान देवनाथ ने काकोरी ट्रेन एक्शन शताब्दी समारोह के दौरान अपना सम्बोधन व्यक्त करते हुए कहा कि आज का दिन हमारे वीर शहीदो को समर्पित है । उन्होने कहा कि 09 अगस्त 1925 काकोरी ट्रेन एक्शन के दौरान वीर शहीदो ने जिस प्रकार अदम्य साहस का परिचय देते हमारे देश से अर्जित किया हुआ धन उस समय की ब्रिटिस सरकार द्वारा अपने देश ले जाया जा रहा था जिसे राम प्रसाद बिस्मिल, अशफाक उल्ला खान, राजेंद्र नाथ लाहिड़ी, चन्द्रशेखर आजाद, ठाकुर रोशन सिंह एवं क्रान्तिकारियों द्वारा वापस ले लिया गया जिसके परिणाम स्वरूप उन्हे फांसी की सजा सुनायी गयी। इस अवसर पर कादीपुर ग्राम प्रधान देवनाथ, अरविंद नायक, दीपक उपाध्याय, सन्तोष नायक,रामबेलास सोनकर, महंत शिवसागर भारती सहित सभी ग्रामवासी उपस्थित रहे।

काकोरी ट्रेन एक्शन, भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में एक महत्वपूर्ण और साहसिक घटना के रूप में दर्ज है। यह घटना 9 अगस्त 1925 को उत्तर प्रदेश के लखनऊ के पास काकोरी नामक स्थान पर घटित हुई थी। इस क्रांतिकारी कार्रवाई का नेतृत्व हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन के सदस्यों ने किया, जिसमें प्रमुख रूप से राम प्रसाद बिस्मिल, अशफाक उल्ला खान, राजेंद्र नाथ लाहिड़ी, चंद्रशेखर आजाद, और कई अन्य देशभक्त शामिल थे। इन स्वतंत्रता सेनानियों ने ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ संघर्ष के लिए धन जुटाने और अपनी क्रांतिकारी गतिविधियों को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से इस कार्रवाई को अंजाम दिया। घटना का मुख्य उद्देश्य ब्रिटिश सरकार के खजाने को लूटना था, जो उस समय एक ट्रेन से ले जाया जा रहा था। ट्रेन के रुकते ही क्रांतिकारियों ने साहस और कुशलता से कार्य करते हुए सरकारी धन को अपने कब्जे में ले लिया। इस घटना ने ब्रिटिश सरकार को हिला कर रख दिया और पूरे देश में हलचल मचा दी। हालांकि, इस साहसिक कार्यवाही के बाद ब्रिटिश सरकार ने कड़े कदम उठाए और क्रांतिकारी गतिविधियों में शामिल कई लोगों को गिरफ्तार कर लिया। इस घटना के परिणामस्वरूप, राम प्रसाद बिस्मिल, अशफाक उल्ला खान, राजेंद्र नाथ लाहिड़ी, और ठाकुर रोशन सिंह को फांसी की सजा सुनाई गई। काकोरी ट्रेन एक्शन भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का एक ऐसा अध्याय है जिसने आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित किया और स्वतंत्रता की लड़ाई को और अधिक उग्र और संगठित रूप देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। यह घटना हमें याद दिलाती है कि स्वतंत्रता की प्राप्ति के लिए कितनी बड़ी कीमत चुकानी पड़ी और इसके लिए कितनी बहादुरी और बलिदान की जरूरत थी।




