छिंदवाड़ा में सास-ससुर ने बहू की शादी कराकर नम आंखों से किया विदा

छिंदवाड़ा/मध्य प्रदेश। आज के वक्त में जब कई घरों में बहूओं को दहेज की मांग को लेकर प्रताड़ित किया जाता है। उस वक्त में शहर के शंकरगढ़ कस्बे से एक अनोखे पुनर्विवाह की खबर आ रही है। ये विवाह एक मिशाल के तौर पर देखा जा रहा है। बेटे की मौत के बाद बहू का दुख दर्द नहीं देख पाए सास-ससुर ने अपनी बेटी की तरह शादी कराकर नम आंखों से विदा किया।
दरअसल, शंकरगढ़ में शनिवार के दिन एक परिवार ने अपनी बहू का पुनर्विवाह किया। अपनी बहू को सास-ससुर ने बेटी की तरह विदा कर समाज के सामने उदाहरण प्रस्तुत किया। बहू का जीवन संवारने के लिए परिवार ने करुणामई विदाई दी। समाज को संदेश संदेश देने वाले इस मुहिम की पूरे जिले में चर्चा है।
शादी के एक साल बाद हुई बेटे की मौत
जानकारी के अनुसार शंकरगढ़ निवासी दंपति मंगल बावरिया एवं आशा बावरिया के पुत्र जय बावरिया का विवाह सागर में संपन्न हुआ था। लेकिन विवाह के एक साल बाद ही सागर की मृत्यु हो गई थी। बहू के इस दुख को देखकर ससुर मंगल बावरिया और सास आशा बावरिया, जेठ-जेठानी प्रेम-पूनम बावरिया, दीपक-मंजू बावरिया बेचैन रहते थे। परिवार के इन लोगों ने बहू के मायके पक्ष से बात कर उन्हें पुर्नविवाह के लिए तैयार किया।
बेटी की तरह किया विदा
इसके बाद न्यूटन नंबर 13 निवासी स्वर्गीय माता दीन मीरा कैथावास के पुत्र अजय बावरिया के साथ गायत्री मंदिर परासिया में विवाह संपन्न करवाया। अपने घर से बहू की बेटी की तरह विदाई की। इस दौरान बुजुर्ग दंपति की आंखों में बेटे के बिछडऩे का दुख और बहू का जीवन संसार बसने का सुख एक साथ देखा जा सकता था। विवाह कार्यक्रम में पासी समाज संगठन के अध्यक्ष ताराचंद बावरिया, सचिव रंजन कैथवास, कोषाध्यक्ष नारायण कैथवास।
हर कोई कर रहा परिवार की सराहना
शंकरगढ़ में हुए इस पुनर्विवाह कार्यक्रम को लेकर हर कोई बावरिया परिवार की इस पहल का स्वागत कर रहा है। क्योंकि ऐसा हमने फिल्मों में देखा है लेकिन रियल लाइफ में कभी-कभी ऐसा वाकया देखने को मिलता है। फिलहाल बहु को विदा करते समय उसके साथ ससुर के आंसू छलक पड़े कार्यक्रम के दौरान अन्य लोग भी भावुक मन से विदाई में शिरकत करते नजर आए।

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