बाढ़ की वजह से बंद पड़े निगमबोध घाट के 3 दानपात्रों में रुपये गले, एक से कैश हुआ चोरी

नई दिल्ली। बाढ़ की वजह से बंद किए गए गीता कॉलोनी श्मशान घाट को पानी उतरने के बाद अंतिम संस्कार के लिए खोल दिया गया। वहीं निगम बोध घाट की सफाई का काम चल रहा है। लेकिन बंद पड़े निगमबोध घाट को चोरों ने नहीं छोड़ा और यहां रखे एक दानपत्र से नकदी चोरी कर ले गए।निगम बोध घाट के मैनेजर विशाल मिश्रा ने बताया कि फिलहाल घाट पर लकड़ियों से ही दाह संस्कार किया जाएगा। टाल के अंदर काफी सूखी लकड़ियां बच गई हैं। इसके अलावा दो ट्रक सूखी लकड़ियां और मंगाई गई हैं। सीएनजी प्लांट पानी में डूबने के कारण फिलहाल चालू नहीं हो पाएगा। उन्होंने बताया कि घाट पर अलग-अलग जगहों पर पांच दानपत्र रखे हुए थे। उनमें से तीन दानपात्रों को खोलकर देखा तो अंदर कीचड़ भरी हुई थी। पानी और कीचड़ की वजह से इन दानपात्रों में रखी 40-50 हजार रुपये की नकदी गल गई। चोरों ने संगम सरोवर के पास लगे दानपात्र को तोड़कर उसमें रखी नकदी चोरी कर ली। वॉटर कूलरों से कॉपर भी चोरी करके ले गए। बाढ़ के पानी से 37 एसी भी खराब हो गए। इसके अलावा आठ शव वाहन भी पानी में डूब गए।
श्मशान घाट का संचालन करने वाली संस्था के मैनेजर विशाल मिश्रा ने बताया कि इसे गुरुवार से खोल दिया जाएगा। निगम बोध घाट की गिनती दिल्ली के सबसे बड़े श्मशान घाटों में होती है। घाट पर अंतिम संस्कार के लिए 136 प्लैटफॉर्म हैं। बाढ़ में डूबने से पहले यहां जिन शवों का दाह संस्कार किया गया था, उनके परिजनों को अस्थियां तक चुनने का मौका नहीं मिला। मौके पर मौजूद सिटी पहाड़गंज जोन के अधिकारियों ने बताया कि साफ-सफाई के लिए दो शिफ्टों में काम किया जा रहा है। आसपास के कई वॉर्डों के कर्मचारियों को सफाई के काम में लगाया गया है। प्रत्येक वॉर्ड से 10 कर्मचारी और एक जूनियर इंजीनियर की ड्यूटी लगाई गई है। इसके अलावा डेम्स विभाग ने भी अपने सफाई कर्मचारियों को श्मशान घाट की सफाई के लिए भेजा हुआ है। सफाई के लिए मशीनों का भी इस्तेमाल किया जा रहा है। इसके अलावा निगम बोध घाट पर काम करने वाले 100 से ज्यादा कर्मचारी भी सफाई के काम में जुटे हुए है। यमुना किनारे बने 20 प्लैटफॉर्म अब भी पानी में डूबे हुए हैं।
गीता कॉलोनी श्मशान घाट खुला
गीता कॉलोनी श्मशान घाट पानी उतरने के बाद खोल दिया गया है। गीता कॉलोनी यमुना पुश्ता के साथ बने गीता कॉलोनी श्मशान घाट के संचालक राजकुमार शर्मा ने बताया कि यमुना में आई बाढ़ में टाल में रखी करीब ढाई लाख की लकड़ियां बह गईं। इसके अलावा घाट पर और कोई नुकसान नहीं हुआ। यमुना का पानी उतरते ही घाट के प्लैटफॉर्मों की साफ-सफाई करने के बाद 16 जुलाई से दाह संस्कार शुरू कर दिए गए।

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