वाराणसी में डीएम और कलेक्ट्रेट कर्मचारियों का रोका गया वेतन

43 साल पुराने जमीन अधिग्रहण मामले में मुआवजा न मिलने पर हुई कार्रवाई

वाराणसी/उत्तर प्रदेश। वाराणसी में एक अनोखा मामला सामने आया है। यहां जिलाधिकारी और कलेक्ट्रेट के सभी कर्मचारियों का इस महीने का वेतन रोक दिया गया है। ये कार्रवाई भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास और पुनर्स्थापन प्राधिकरण कोर्ट के आदेश पर हुई है। कोर्ट ने 43 साल पुराने जमीन अधिग्रहण मामले में मुआवजा न देने पर कलेक्ट्रेट अधिकारियों का वेतन रोकने का आदेश दिया था। यह जमीन बनारस लोकोमोटिव वर्क्स के लिए रेलवे ने अधिग्रहित की थी।जिला अधिवक्ता (सिविल) सुलभ प्रकाश ने बताया, “हम बुधवार को कोर्ट को सूचित करेंगे कि याचिकाकर्ता पुरुषोत्तम द्वारा मांगे गए 10 लाख रुपये का मुआवजा दे दिया गया है।” बुधवार को इस मामले की अगली सुनवाई है।
विशेष भूमि अधिग्रहण अधिकारी नीरज प्रसाद ने बताया कि कोर्ट ने 10 लाख रुपये की राशि के लिए वेतन खाते को फ्रीज करने का आदेश दिया है। संबंधित अधिकारियों को कोर्ट के आदेश के मद्देनजर यह राशि अलग रखने और बाकी बची राशि से वेतन देने को कहा गया है। लारा कोर्ट के जज किरण पाल सिंह ने 27 जनवरी को यह आदेश पारित किया था। पुरुषोत्तम की याचिका पर सुनवाई करते हुए वाराणसी कलेक्ट्रेट के सिविल हेड अकाउंट को अटैच करने का आदेश दिया गया। पुरुषोत्तम ने 1982 में डीजल लोकोमोटिव वर्क्स (अब बीएलडब्ल्यू) के लिए अधिग्रहित अपनी जमीन के लिए 10 लाख रुपये के मुआवज़े की मांग की थी।
पुरुषोत्तम के वकील एके श्रीवास्तव ने बताया कि पुरुषोत्तम ने 1988 में वाराणसी की एक अदालत में मुकदमा दायर किया था। 6 साल के इंतजार के बाद भी उन्हें मुआवज़ा नहीं मिला था, इसलिए उन्होंने केस किया। एके श्रीवास्तव ने कहा, “1994 में, अदालत ने तत्कालीन वाराणसी जिलाधिकारी को वादी को मुआवजा देने का आदेश दिया था, लेकिन कोई भुगतान नहीं किया गया।”

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