कर्नाटक सरकार ने पड़ोसी आंध्र प्रदेश को दिए 4 कुमकी हाथी

जानिए इस गजराज की खासियत क्या है?

बेंगलुरु/एजेंसी। कर्नाटक सरकार ने बुधवार को अपने पड़ोसी आंध्र प्रदेश को चार ट्रेंड कुमकी हाथी दे दिए। विदाई से पहले कर्नाटक के विधान सौध में इन हाथियों का परेड हुआ। अब ये कुमकी हाथी आंध्र प्रदेश में आतंक बने जंगली हाथियों को इंसानी बस्तियों से दूर करने में वन विभाग की मदद करेंगे। कुमकी हाथियों को खास तरीके से ट्रेनिंग दी जाती है। कुमकी का मतलब होता है ‘सहायक’। ये एशियाई हाथी मुश्किल परिस्थितियों में भी शांत रहते हैं और अपने महावत के आदेशों का पालन करते हैं। इनका मुख्य काम जंगली हाथियों को गांवों से दूर भगाना, बचाव कार्यों में मदद करना और नए पकड़े गए हाथियों को प्रशिक्षित करना है।
जब जंगली हाथी फसलों या गांवों पर हमला करते हैं, तो कुमकी हाथियों का इस्तेमाल उन्हें बिना हिंसा के वापस जंगल में भेजने के लिए किया जाता है। जब जंगली हाथियों को पकड़ा जाता है, तो कुमकी हाथी उनके साथ चलते हैं। ये कुओं, कीचड़ या अन्य खतरनाक जगहों में फंसे हाथियों को बचाने में भी मदद भी करते हैं। तमिलनाडु में कलीम नाम का एक कुमकी हाथी ऐसे ही कामों के लिए लोकप्रिय था। वह 60 साल की सेवा के बाद 2023 में रिटायर हुआ था। रिटायरमेंट के मौके पर तमिलनाडु वन विभाग ने उसे गार्ड ऑफ ऑनर देकर सम्मानित किया था।
दक्षिण भारत के तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और केरल राज्यों में इंसानों और हाथियों के बीच अक्सर संघर्ष होता रहता है। वहां कुमकी हाथियों की जरूरत होती है। कुमकी हाथी का उसके महावत से खास रिश्ता होता है। आम हाथियों के मुकाबले, कुमकी हाथी बहुत अनुशासित होते हैं और अपने महावत की बात मानते हैं। वे मुश्किल हालात में भी शांत रहते हैं और आदेशों का पालन करते हैं। कुछ को तो इतना ट्रेंड किया जाता है कि वे जंगली हाथी को डराने के लिए चुपचाप चलते हैं। महावत अक्सर जीवन भर एक ही हाथी के साथ रहते हैं। यह लंबा साथ उन्हें हाथी के इशारों को समझने और बिना बल प्रयोग के उन्हें नियंत्रित करने में मदद करता है।

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