गैंगस्टर अनिल दुजाना कभी गाजियाबाद नगर निगम में काटता था पर्ची

उत्तर प्रदेश डेस्क। कुख्यात अनिल अनिल दुजाना युवावस्था में गाजियाबाद नगर निगम में पार्किंग की पर्ची काटता था। पर्ची काटते हुए अपने शौक पूरे करता था। फिर उसकी गांव के ही टीटू नाम के एक युवक के साथ रहने लगा। टीटू के खिलाफ कई आपराधिक केस दर्ज थे। टीटू की देहरादून में हत्या हो गई। उसके बाद ही है सुंदर भाटी से संपर्क में आया और उसके साथ सरिया का अवैध कारोबार करने लगा। अनिल दुजाना के पिता के नाम 10 बीघा जमीन गांव में है। बड़ा बेटा फौज से रिटायर हो चुका है और वह गुड़गांव अपने परिवार के साथ रहता है। एक भाई की गैंगवार में हत्या हो गई। तीसरा भाई दिल्ली एक प्राइवेट कंपनी में नौकरी करता है। एक बहन है।
अनिल दुजाना ने जेल में रहते हुए ही पश्चिम से लेकर पूर्वांचल तक अपना नेटवर्क फैला लिया था। वह यूपी की जिस जेल में रहा वहां बंद कुख्यात को अपने साथ जोड़ लिया। जेल में रहते हुए ही उसका पूर्वांचल के कुख्यात मुन्ना बजरंगी और संजीव उर्फ जीवा माहेश्वरी से संपर्क हुआ। मुन्ना की मदद से ही अनिल दुजाना ने दिल्ली में रेलवे के ठेकों में दखल देना शुरू कर दिया था। हालांकि इस बीच मुन्ना बजरंगी 9 जुलाई 2018 को बागपत जेल में सुनील राठी के हाथों मारा गया।
जब अनिल दुजाना बुलंदशहर जेल में था तो वह उमेश पंडित और विक्की सुनहरा से जुड़ा। विक्की सुनहरा ने ही अनिल दुजाना की मुलाकात मुन्ना बजरंगी से करवाई। इसके बाद मुन्ना और अनिल दुजाना गैंग की नजदीकियां काफी बढ़ गईं। अनिल दुजाना ने मैनपुरी जेल में बंद एक अपराधी के लिए मुन्ना बजरंगी से मदद भी मांगी थी। जिस पर मुन्ना ने मैनपुरी जेल में बंद संजीव माहेश्वरी उर्फ जीवा से उसकी मदद कराई थी।
कुख्यात अनिल दुजाना की शादी भी जेल में रहते हुए ही तय हुई। उसकी शादी का किस्सा भी रोचक है। दरअसल उसके ससुर नोएडा के गिटोरा गांव निवासी लीलू का गांव के ही राजू पहलवान से संपत्ति विवाद चल रहा था। राजू ने लीलू पर दबाव बनाने के लिए अपनी बेटी की शादी हरेंद्र खड़खड़ी नामक कुख्यात से करवा दी। इस पर लीलू ने उसे पटखनी देने के लिए अपनी बेटी प्रिया की शादी अनिल दुजाना से तय करवा दी। उस दौरान अनिल दुजाना महाराजगंज जेल में बंद था। फरवरी 2019 में अनिल दुजाना के साथी योगेश डाबरा और वीरेंद्र ने यह शादी तय कराने में अहम भूमिका निभाई।
अनिल दुजाना की सहारनपुर व शामली में आतंक का पर्याय रहे मुकीम काला गैंग से भी काफी नजदीकियां थीं। उमेश पंडित जब तिहाड़ जेल में बंद था तो वहां उसकी मुलाकात मुकीम काला गैंग से जुड़े कुछ लोगों से हुई थी। जब वे युवक जेल से रिहा हुए तो उमेश पंडित ने उन्हें अनिल दुजाना का काम देखने वाले देवेन्द्र अगरोला और शहजाद उर्फ मामा के पास भेज दिया। इन युवकों ने ही मुकीम काला, सादर तीतरों, साबिर जंधेड़ी, महताब काना का संपर्क अनिल दुजाना गैंग से करवाया। अनिल के गैंग का अनित उर्फ तोता बाद में मुकीम काला गैंग से जुड़ गया था। मुकीम काला फरारी काटने के लिए अनिल दुजाना के जरिए रणदीप भाटी और शहजाद उर्फ मामा के जरिए नोएडा और दिल्ली में शरण लेता था।




