व्यापारी से 90000 की लूट के आरोपित दारोगा ने किया सरेंडर, भेजा जेल, महिला इंस्पेक्टर समेत 4 अभी भी फरार

गोरखपुर में व्यापारी से 90 हजार रुपये लूटने के मामले में निलंबित दारोगा शुभम श्रीवास्तव ने कोर्ट में सरेंडर कर दिया, जिसके बाद उसे न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया। यह घटना राजघाट पुल पर एक व्यापारी के अपहरण और लूट से जुड़ी है।
गोरखपुर/उत्तर प्रदेश। राजघाट पुल पर व्यापारी को अगवा कर 90 हजार रुपये लूटने के मामले में आरोपित निलंबित दारोगा शुभम श्रीवास्तव ने शुक्रवार को विशेष न्यायाधीश भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम ओमकार शुक्ल की कोर्ट में सरेंडर किया। कोर्ट ने उसे न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया। वहीं इस प्रकरण में शामिल महिला दारोगा समेत चार अन्य पुलिसकर्मी अभी फरार हैं, जिनकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस दबिश दे रही है।
लखनऊ के गोमतीनगर स्थित विरामखंड निवासी शुभम श्रीवास्तव नौसढ़ चौकी प्रभारी के पद पर तैनात था। पांच अगस्त 2025 को बेलीपार क्षेत्र के पिछौरा निवासी (वर्तमान में राजस्थान में रह रहे) व्यापारी रविशंकर को कार सवार कुछ लोगों ने अगवा कर लिया था। आरोप है कि खुद को पुलिसकर्मी बताकर उन्हें राजघाट पुल के पास रोका गया और 90 हजार रुपये लूट लिए गए।
मामले की जांच में चौंकाने वाला तथ्य सामने आया। वारदात में नौसढ़ पुलिस चौकी पर तैनात पुलिसकर्मी ही शामिल पाए गए। इसके बाद तत्कालीन चौकी प्रभारी शुभम श्रीवास्तव, महिला दारोगा आंचल, सिपाही प्रवीण यादव, राजेश चौधरी और सुभाष यादव को निलंबित कर विभागीय जांच शुरू की गई।
इसके बाद आरोपित पुलिसकर्मी फरार हो गए। गिरफ्तारी से बचने के लिए हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर स्टे ले लिया था। कोर्ट ने उन्हें विवेचना में सहयोग करने का निर्देश दिया था, लेकिन पुलिस की रिपोर्ट में बताया गया कि आरोपित न तो जांच में सहयोग कर रहे हैं और न ही पीड़ित को धमका रहे हैं। इसके बाद हाईकोर्ट ने गिरफ्तारी पर लगी रोक हटा दी।
पीड़ित व्यापारी ने गीडा थाने में आरोपितों के खिलाफ समझौते के लिए दबाव बनाने और धमकी देने का एक और मुकदमा भी दर्ज कराया है। लूट के इस मामले में भ्रष्टाचार की धारा भी बढ़ाई गई है। वर्तमान में सीओ कोतवाली ओंकार दत्त तिवारी मामले की विवेचना कर रहे हैं। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि फरार आरोपितों की जल्द गिरफ्तारी कर न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया जाएगा।




