पाकिस्तान का अंतकाल, चीन में मचेगा हाहाकार, नौसेना में शामिल हो गई सबमरीन आईएनएस वगीर

नेशनल डेस्क। कलवारी श्रेणी की पनडुब्बियों की पांचवीं सबमरीन आईएनएस वगीर को भारतीय नौसेना में शामिल कर लिया गया है। फ्रांस से प्रौद्योगिकी हस्तांतरण के साथ यहां मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड द्वारा निर्मित आईएनएस वगीर को नौसेनाध्यक्ष एडमिरल आर हरि कुमार की उपस्थिति में एक समारोह में कमीशन किया गया। नौसेना ने कहा कि पनडुब्बी भारतीय नौसेना की क्षमता को बढ़ावा देगी ताकि दुश्मन को रोकने में भारत के समुद्री हितों को आगे बढ़ाया जा सके और संकट के समय में निर्णायक झटका देने के लिए खुफिया, निगरानी और टोही (आईएसआर) का संचालन किया जा सके।

आईएनएस वागीर स्पेशल सीरिज की सबमरीन है। जिसे खासतौर से कॉम्बेट ऑपरेशन के लिए तैयार किया गया है। यानी इसी बनाने से पहले ही तय हो चुका था कि ऐसी सबमरीन इंडियन नेवी को दी जाएगी, जो न केवल दुश्मन से बचाएगी बल्कि दुश्मन को हमला करने का मौका भी नहीं दे रही। नवंबर 2020 में लॉन्च हुई वागीर पन्डुब्बी का परीक्षण फरवरी के महीने से शुरू हुआ था और अब इसने सारे परीक्षण पूरे कर लिए। ये आत्मनिर्भर भारत का बहुत ही बड़ा कदम है। वागीर का निर्माण पूरी तरह भारत में ही हुआ है। मझगांव डोकियार्ड में इस सबमरीन को तैयार किया गया। इसे बेहद की सीक्रेट तरीके से बनाया गया। इसकी सबसे बड़ी खूबी दुश्मन के जासूसी जहाज को ट्रैक करके उस पर अटैक करना है।

वागीर सबमरीन की ताकत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इस सबमरीन में अत्याधुनिक तकनीक से लैस नेविगेशन के सिस्टम लगाए गए हैं। भारत समुद्र में अपनी सुरक्षा तेजी से बढ़ा रहा है क्योंकि चीन साउथ चाइना सी में काफी एग्रेसिव है और धीरे-धीरे हिंद महासागर में दूसरे देशों की सीमाओं की तरफ भी नजर उठा रहा है। ऐसे वक्त में भारत ने कलवारी प्रोजेक्ट लॉन्च किया है। जिसके तहत इस सबमरीन को समुद्र में उतारा गया है।

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