मेरठ में मर्जी से जेल की रोटी खाने पहुंच रहे लोग!, ज्योतिषी की भविष्यवाणी का ‘जेल योग’ कनेक्शन

मेरठ/उत्तर प्रदेश। आमतौर पर जेल का नाम सुनते ही लोगों के मन में सख्ती और सलाखों के पीछे की जिंदगी का ख्याल आता है, लेकिन मेरठ जेल में इन दिनों एक अलग ही नजारा देखने को मिल रहा है। यहां कैदी नहीं, बल्कि आम लोग खुद अपनी मर्जी से जेल का खाना और पानी मांगने पहुंच रहे हैं। वजह है हाल ही में पड़े चंद्र ग्रहण के बाद फैली एक ज्योतिषीय धारणा, जिसमें कहा जा रहा है कि ग्रहण के प्रभाव से कई लोगों पर ‘जेल योग’ बन गया है। इस योग को टालने के लिए पंडितों ने उपाय बताया कि जेल जाकर वहां का खाना और पानी ग्रहण कर लिया जाए, ताकि असली जेल की सजा से बचाव हो सके।
वरिष्ठ जेल अधीक्षक डॉ. वीरेश राज के मुताबिक, पहले महीने में तीन से चार लोग ही इस तरह की मांग लेकर जेल पहुंचते थे, लेकिन चंद्र ग्रहण के बाद अचानक संख्या बढ़ गई है। अब हर हफ्ते करीब 10 से 12 लोग जेल के दरवाजे पर दस्तक देकर विशेष अनुरोध करते हैं कि उन्हें जेल का बना खाना और जेल का पानी दिया जाए।
डॉ. वीरेश राज बताते हैं कि शुरुआत में इन लोगों को मना कर दिया जाता था, लेकिन जब वे ज्योतिषीय ‘जेल योग’ का हवाला देकर बार-बार निवेदन करते हैं तो स्टाफ भी मान जाता है। ऐसे में किसी को सिर्फ एक टुकड़ा रोटी, तो किसी को पूरी रोटी और सब्जी परोस दी जाती है। वहीं, पानी पीने के लिए लोग जेल परिसर में लगे हैंडपंप से ही पानी पीकर लौट जाते हैं।
इन लोगों से जब वजह पूछी जाती है तो उनका सीधा जवाब होता है कि पंडित जी ने कहा है कि हमारे ग्रह-नक्षत्र ऐसे बने हैं कि भविष्य में जेल जाना पड़ सकता है। अगर अभी जेल का खाना और पानी ले लिया जाए तो यह योग कट जाएगा और जेल की सजा से छुटकारा मिल जाएगा।
जेल प्रशासन भी इस नई परंपरा से हैरान है। हालांकि, अधिकारियों का कहना है कि जेल का खाना आमतौर पर कैदियों के लिए ही होता है, लेकिन जब लोग बार-बार निवेदन करते हैं और अपनी आस्था को इससे जोड़ते हैं तो उन्हें खाली हाथ लौटाना मुश्किल हो जाता है।
मेरठ जेल का यह अनोखा मामला आस्था और अंधविश्वास के मेल को दर्शाता है। लोग भविष्य की आशंकाओं से बचने के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं, भले ही इसके लिए उन्हें जेल का दरवाजा ही क्यों न खटखटाना पड़े।




