कानपुर से चल रहा था सबसे बड़ा डिग्री रैकेट! टेलीकालिंग की आड़ में 98 विश्वविद्यालयों तक नेटवर्क, सरगना का भांजा गिरफ्तार
कानपुर में फर्जी डिग्री बनाने वाले गिरोह के सरगना डॉ. मनीष के भांजे राघव सर्राफ को गिरफ्तार किया गया है। यह गिरोह टेलीकॉलिंग की आड़ में 98 विश्वविद्यालयों तक अपना नेटवर्क फैलाए हुए था और घर-घर डिग्रियां डिलीवर करता था।

कानपुर/उत्तर प्रदेश। एसआइटी और किदवई नगर थाना पुलिस ने फर्जी मार्कशीट, डिग्री और माइग्रेशन सार्टिफिकेट बनाने के मामले में मंगवाल को नौवीं गिरफ्तारी की। टीम ने गिरोह के सरगना डा.मनीष के भांजे फरीदाबाद निवासी राघव सर्राफ को किदवई नगर ए-ब्लाक स्थित शनिदेव मंदिर के पास से गिरफ्तार किया। राघव फरीदाबाद, नोएडा, दिल्ली, गाजियाबाद समेत अन्य स्थानों में घर-घर जाकर डिग्रियां डिलीवरी करने का काम करता था, जो वर्ष 2020 में गिरोह से जुड़ा था। पूछताछ में आरोपितों ने अब तक 65 डिग्रियां अलग-अलग स्थानों पर डिलीवर करने की बात कबूल की है।
डीसीपी दक्षिण दीपेंद्र नाथ चौधरी ने बताया कि सोमवार को मूलरूप से राजस्थान के सीकर और वर्तमान में हैदराबाद के हिमायत नगर स्थित राजाराम अपार्टमेंट में रहने वाले सरगना डा.मनीष कुमार और उसके साथी उन्नाव के कोचिंग संचालक अर्जुन यादव को जेल भेजा था। सरगना से पूछताछ में उसके भांजे मनीष सर्राफ का नाम सामने आया था, जिसके बारे में जानकारी जुटाई गई तो पता चला कि वह शहर में ही है। इसके बाद उसकी तलाश शुरू हुई तो उसके शनिदेव मंदिर के पास से दबोच लिया गया।
वर्ष 2019 में मनीष के गोरखधंधे में शामिल होने के बाद 2020 में उसने 12वीं पास भांजे राघव को शामिल कर लिया था। पूछताछ में राघव ने बताया कि गिरोह के डिलीवरी का काम करता था। गिरोह के सदस्य उसे सीलबंद पैकेट में डिग्रियां, सर्टिफिकेट व मार्कशीट देते थे, जिसे वह दिल्ली, गाजियाबाद, साहिबाबाद, नोएडा, फरीदाबाद समेत अन्य स्थानों पर पहुंचाता था। राघव के मुताबिक उसे हाईस्कूल से ग्रेजुएशन तक की मार्कशीट पर 10 हजार रुपये, माइग्रेशन व प्रोफेशनल सर्टिफिकेट पर 15 हजार रुपए मिलते थे। आरोपित के पास से लिंग्याज विद्यापीठ फरीदाबाद का एक प्रोविजनल सर्टिफिकेट, आइसीआइसीआइ बैंक की दो चेक मिली है।
दो बार दुबई जा चुके डा. मनीष कुमार ने विदेशों तक अपनी धाक जमाने के लिए वर्ष 2022 में लंदन की संस्था ग्लोबल बुक आफ एक्सीलेंस अवार्ड की फ्रेंचाइजी लेने का प्रयास किया था। लंदन की हिज मैजेस्टीज़ रेवेन्यू एंड कस्टम्स (एचएमआरसी) संस्था ने जांच के मनीष से दस्तावेज मांगे थे। इस पर उसने आधार कार्ड दिया जिसे संस्था ने खारिज कर दिया। उसके पासपोर्ट को भी इसके लिए खारिज कर दिया गया। इसके बावजूद डा. मनीष ने फर्जीवाड़ा करते हुए मुंबई, गोवा और बेंगलुरु में चार बार एक्सीलेंस अवार्ड समारोह आयोजित कराया, जिसके प्रमोशन के लिए उसने कई फिल्म अभनेता,टीवी धारावाहिक में काम करने वाले कलाकारों को भी सम्मानित किया।
पुलिस आयुक्त रघुबीर लाल ने बताया कि फर्जी डिग्री बनाने वाले गिरोह की जांच में पांच और नाम सामने आए हैं। इसमें कानपुर निवासी शेखर गुप्ता है। शेखर गुप्ता के बारे में कुछ जानकारी मिली है। यह दक्षिण क्षेत्र का रहने वाला है। डाक्टर मनीष इसे ही गिरोह का सरगना बताता है। दूसरा नाम मौली नाम की लड़की का है, जो हैरादाबाद ही रहने वाली है। मौली डाक्टर मनीष द्वारा संचालित काल सेंटर में काम करती थी। मध्यप्रदेश का रहने वाला संतोष शुक्ल भी पुलिस के निशाने पर है। दो अन्य नाम भी प्रकाश में आए हैं।
98 विश्वविद्यालयों से टेलीकालिंग की आड़ में संपर्क था फर्जी डिग्री और मार्कशीट गिरोह का सरगना डा. मनीष कुमार देशभर के 98 विश्वविद्यालयों से टेलीकालिंग की आड़ में संपर्क था। उसने हैदराबाद में इंस्टीट्यूट के साथ काल सेंटर बना रखा था। वहां 20 युवक-युवतियों को टेलीकालिंग के लिए रखा था, जिनका काम फेल होने वाले छात्र–छात्राओं, नौकरी के लिए डिग्री व सर्टिफिकेट तैयार कराने के लिए प्रोत्साहित करने का था। इसके लिए वह उन्हें 25 से 30 हजार रुपये प्रतिमाह वेतन देता था।
मार्कशीट के 10 हजार, सर्टिफिकेट के 15 हजार
राघव ने बताया कि उसे हाईस्कूल से ग्रेजुएशन तक की मार्कशीट पर 10 हजार रुपये, माइग्रेशन व प्रोफेशनल सर्टिफिकेट पर 15 हजार रुपये मिलते थे। आरोपित के पास से लिंग्याज विद्यापीठ फरीदाबाद का एक प्रोविजनल सर्टिफिकेट, आइसीआइसीआइ बैंक की दो चेक मिली हैं। राघव के मोबाइल फोन से कानपुर की सीएसजेएमयू, पुणे की डीवाइ पाटिल, बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी, हैदराबाद की जवाहर लाल, हैदराबाद की आचार्य नागार्जुन, मेरठ की चौधरी चरण सिंह, असम एस्टेट डेंटल कालेज, उस्मानिया यूनिवर्सिटी, तमिलनाडु की अलागप्पा, चेन्नई की अन्ना, रायपुर की पंडित रविशंकर, नासिक की यशवंत राव चौहान समेत 17 यूनिवर्सिटी के प्रमाणपत्र व डिग्रियां मिली हैं।
पुलिस की जांच में सामने आया कि मनीष ने वर्ष 2011 में मां रचना के नाम पर हैदराबाद में रचना अग्रवाल एजुकेशनल सोसाइटी बनाई थी। मनीष की फेसबुक के जरिये कानपुर के शेखर गुप्ता से पहचान हुई थी। वर्ष 2019 में वह पहली बार यहां आया था। शेखर अलग-अलग राज्यों से ग्राहकों की मांग जुटाकर वाट्सएप के माध्यम से नाम, फोटो, विषय, रोल नंबर और यूनिवर्सिटी की जानकारी मनीष तक पहुंचाता था। इसके बाद पूरा डाटा इंदौर निवासी संजय पंजानी को भेजा जाता था, जिसके पास उच्च गुणवत्ता का प्रिंटिंग सेटअप था। वहीं पर फर्जी डिग्रियां बनाई जाती थीं। मनीष ने हैदराबाद, मुंबई, बेंगलुरु प फरीदाबाद तक इस फर्जीवाड़े का नेटवर्क फैला दिया था। पुलिस आयुक्त ने बताया कि जांच में मनीष के काल सेंटर में काम करने वाली हैदराबाद की युवती मौली, मध्यप्रदेश के संतोष शुक्ल समेत पांच और नाम सामने आए हैं।




