चौखट पर दंडवत हुए संत प्रेमानंद , झर-झर बहे आंसू!, राजेंद्र दास महाराज, जिनसे मिलकर दिलभर रोए महाराज

मथुरा/उत्तर प्रदेश। मथुरा-वृंदावन के चर्चित संत प्रेमानंद जी महाराज के स्वास्थ्य को लेकर इन दिनों खूब चर्चा हो रही है। दरअसल पिछले दिनों उनका स्वास्थ्य खराब हुआ था। इसके बाद उनकी पदयात्रा पर रोक लग गई। इसके बाद से संत प्रेमानंद के स्वास्थ्य को लेकर उनके भक्तों और चाहने वालों में लगातार चर्चा होती रही है। संत समाज भी प्रेमानंद महाराज के स्वास्थ्य को लेकर चिंतित है। पिछले दिनों लगातार कई संत श्री राधा केली कुंज आश्रम पहुंचकर प्रेमानंद महाराज के स्वास्थ्य की जानकारी लेते दिखे है। इसी क्रम में मलूक पीठ के पीठाधीश्वर राजेंद्र दास जी महाराज ने संत प्रेमानंद महाराज से मुलाकात की।
प्रेमानंद महाराज और राजेंद्र दास जी महाराज की मुलाकात का वीडियो सोशल मीडिया पर जारी किया गया। सोशल मीडिया पर वीडियो आते ही यह वायरल हो गया। वीडियो में दिख रहा है कि राजेंद्र दास जी महाराज का स्वागत करने प्रेमानंद महाराज स्वयं आश्रम के द्वार तक आए। चौखट पर ही उन्होंने राजेंद्र दास जी महाराज के कदमों में दंडवत होकर स्वागत किया। इस दौरान राजेंद्र दास जी महाराज भी दंडवत होकर मिलन करते दिखे। इसके बाद प्रेमानंद महाराज ने राजेंद्र दास जी महाराज की चरण वंदना की।
संत प्रेमानंद महाराज ने राजेंद्र दास जी महाराज के चरणों को धोकर आश्रम में स्वागत किया। उनके आगमन पर खुशी जाहिर की। प्रेमानंद महाराज से पिछले दिनों बागेश्वर धाम सरकार धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री मिलने पहुंचे थे। अब राजेंद्र दास जी महाराज के आगमन पर संत प्रेमानंद महाराज की भावनाएं उमड़ती दिखी। उनके स्वागत के दौरान संत प्रेमानंद भावुक दिखाई दिए। उनकी आखों से खुशी के आंसू बहते दिखे।
राजेंद्र दास जी महाराज मलूक पीठ के पीठाधीश्वर हैं। वह वृंदावन में रहते हैं। दरअसल, मलूक पीठ की स्थापना वृंदावन में संत शिरोमणि मलूक दास के नाम पर की गई थी। इससे पहले श्री मलूक दास जी अखाड़ा कहा जाता था। इस स्थान पर मलूक दास जी महाराज करीब 2500 संतों के साथ रहते थे। इसे आज भी जागृत समाधि के रूप में माना जाता है। मलूक मठ के पीठाधीश्वर अभी राजेंद्र दास जी महाराज हैं। राजेंद्र दास जी महाराज के गुरु रामानंदी संत के रूप में जाने जाते हैं। राजेंद्र दास जी के वृंदावन में अध्ययन के लिए ले जाने में उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
राजेंद्र दास जी महाराज संस्कृत भाषा और श्रीमद्भगवद पुराण के विशेष ज्ञाता है। उनकी वाणी सुनने वालों को जीवन के कष्ट और निराशा से मुक्ति मिलती है। राजेंद्र दास जी महाराज का जन्म चित्रकूट के निकट एक छोटे से गांव में वर्ष 1954 में हुआ था। उनके व्याख्यानों से भक्त आनंद का अनुभव करते हैं। इसमें दिव्यता का प्रसार होता है।
राजेंद्र दास जी महाराज के आश्रम में आगमन पर प्रेमानंद महाराज ने कुछ सुनाने का अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि आपके प्रवचन को सुनकर आनंद का अनुभव होता है। इस पर राजेंद्र दास जी महाराज ने ‘प्यारी तेरे नैना मदन सरवारी, रत्ननारी कारी कजरारी’ सुनाया। इसके बाद प्रभु श्रीराम और श्रीकृष्ण को लेकर दोनों संतों के बीच विमर्श हुआ। राजेंद्र दास जी महाराज ने इस मौके पर कहा कि श्रीजी की विशेष कृपा है, जो आप जैसी विभूति को उन्होंने इस धरा पर भेजा। इस पर प्रेमानंद महाराज ने कहा कि हम इतना नहीं जानते हैं। हम बस इतना जानते हैं कि हम भक्तों पर श्रीजी की कृपा बनी रहे।

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