लगातार मौतों से बदला ग्रामीणों का इरादा, गांव को बचाने के लिए चलाया अभियान, कभी कहलाता था शराब का गढ़

बलौदाबाजार/छत्तीसगढ़। बलौदाबाजार जिले का खैरी गांव इन दिनों सुर्खियों में है। यह गांव कभी कभी अवैध और कच्ची शराब के रूप में फेमस था लेकिन अब यहां के लोगों के कारण हालात बदल रहे हैं। ग्रामीणों की मांग है कि यहां पूर्ण शराबबंदी होनी चाहिए। ग्रामीणों ने प्रशासन के सहयोग से गांव में पूर्ण शराबबंदी के लिए विशेष अभियान चलाया है। जिसके बाद से इस गांव में बीते 5 दिनों से शराब प्रतिबंधित है।
ग्रामीणों का कहना है कि गांव के करीब 50 से ज्यादा लोगों की मौत बीते 10 सालों में शराब पीने के कारण हुई है। इसके बाद से लोगों ने यहां शराब को प्रतिबंधित करने के लिए अभियान चलाया है। खैरी गांव में रहने वाले लोग भी कच्ची शराब का निर्माण करते हैं। यहां बड़े पैमाने में अवैध शराब का भी कारोबार किया जाता है जिससे युवाओं में गलत असर पड़ता है। अब लोग शराब के खिलाफ अभियान चला रहे हैं।
शराब के कारण लगातार हो रही मौत के कारण ग्रामीणों का मन बदल गया है। ग्रामीणों ने अब शराब के खिलाफ अभियान छेड़ दिया है। ग्रामीणों ने बताया पहले कुछ लोग विरोध करते थे लेकिन अब प्रशासन का भी साथ मिला है। ग्रामीणों ने कहा कि कुछ लोगों ने गांव के हालात के बारे में एसपी भावना गुप्ता को जानकारी दी। जिसके बाद बाद उन्होंने विशेष अभियान चलाया। ग्रामीणों ने भी सहयोग दिया।
महिलाओं और युवाओं का इस अभियान में पुलिस को साथ मिला। जिसके बाद से लोगों का मन बदला और गांव वालों ने फैसला किया कि अपने गांव को शराब की लत से बाहर निकालना है। थाना प्रभारी हेमंत पटेल ने बताया कि ग्रामीणों के मन को बदलने के लिए इस गांव में करीब 6 महीने तक अभियान चलाया गया। इस दौरान कई मुश्किलें भी थीं लेकिन ग्रामीणों का सहयोग मिलने के बाद अब गांव के लोग शराब के खिलाफ खड़े हो गए हैं।
खैरी गांव के लोग अब मांग कर रहे हैं कि पूर्ण शराबबंदी होनी चाहिए। लोगों का कहना है कि शराब समाज के लिए खतरनाक है और इस पर प्रतिबंध लगना चाहिए। प्रशासन ने भी ग्रामीणों के पहल की तारीफ की है।

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