डीएनडी फ्लाइवे पर अब नहीं देना होगा टोल टैक्स,सुप्रीम कोर्ट की मुहर के बाद झूमे एनसीआर वासी

Now you will not have to pay toll tax on DND flyway, NCR residents are happy after Supreme Court's approval

  • दो हजार करोड़ की वसूली पर दिखाया था 2300 करोड़ का घाटा।
  • घाटा दिखाने पर बढ़ जाता था टोल का कॉन्ट्रेक्ट।

नोएडा। दिल्ली-नोएडा डायरेक्ट (डीएनडी) फ्लाइवे पर टोल न वसूलने के सुप्रीम कोर्ट के फैसले से शुक्रवार को शहरवासी झूम उठे। फेडरेशन आफ नोएडा रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (फोनरवा) ने सेक्टर-52 स्थित कार्यालय में जश्न मनाया। इससे जनता की जीत बताई। डीएनडी मार्ग के जरिए हर रोज हजारों की संख्या में लोगों का वाहनों का आवागमन होता है। ऐसे में यहां एक ओर से गुजरने वाले वाहनों से टोल टैक्स आठ रुपये से शुरू होकर 28 रुपये तक वसूला जाने लगा था।
कई बार धरना प्रदर्शन हुए थे। प्राधिकरण और जिला प्रशासन से शिकायत दर्ज कराई गई थी, लेकिन कोई बात नहीं बन सकी, तो मामला हाई कोर्ट पहुंचा था। दिल्ली-नोएडा डायरेक्ट (डीएनडी) फ्लाइवे पर नोएडा टोल ब्रिज कंपनी लिमिटेड (एनटीबीसीएल) ने दो हजार करोड़ की वसूली पर 23 सौ करोड़ रुपये का घाटा दिखाया था। एग्रीमेंट की शर्तों के मुताबिक घाटा होने पर टोल का कॉन्ट्रेक्ट बढ़ता था।
फेडरेशन ऑफ नोएडा रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (फोनरवा) ने एग्रीमेंट को बारीकी से देखा। कानूनी सलाह ली। मामले को वर्ष 2012 में हाई कोर्ट में लेकर पहुंची। करीब चार वर्ष तक यह लड़ाई लड़ी। चार वर्ष में 70 से ज्यादा सुनवाई हुईं।हाईकोर्ट ने वर्ष 2016 में कंपनी के एग्रीमेंट को गलत बताते हुए टोल नहीं लेने का आदेश जारी किया। हाई कोर्ट के आदेश पर अंतरिम रोक लगाने के लिए एनटीबीसीएल ने सुप्रीम कोर्ट में स्पेशल लीव पिटीशन (एसएलपी) दाखिल की।
फोनरवा के पूर्व अध्यक्ष एनपी सिंह ने बताया कि करोड़ों की वसूली केे बाद भी टोल कंपनी ने घाटा बढ़ते हुए क्रम में दर्शाया। इसकी शुरूआत 400 करोड़ के घाटे के साथ हुई। जब हाईकोर्ट में फैसला सुनाया गया था उस वक्त टोल कंपनी ने 2000 करोड़ की वसूली करने के बाद भी 2300 करोड़ रुपये का घाटा दर्शाया।
इसमें 197 करोड़ रुपये सिर्फ वकीलों की फीस थी। टोल कंपनी के निदेशकों का वेतन तीन से चार करोड़ दिखाया गया। डीएनडी टाेल पर लूट की जा रही थी। कंपनी दर्शाए गए घाटे का हाई कोर्ट में जवाब नहीं दे सकी। 7.5 किमी लंबे और आठ लेन के डीएनडी फ्लाइवे बनाने में करीब 420 करोड़ रुपये खर्च हुए। एनटीबीसीएल ने 250 करोड़ का बैंक लोन, 150 करोड़ शेयर होल्डिंग और 20 करोड़ रुपये नोएडा प्राधिकरण से लिए। कोर्ट के अनुसार एग्रीमेंट में कई नियमों का उल्लंघन हुआ। टोल के लिए ओपन टेंडरिंग नहीं हुई। इस एग्रीमेंट के तहत कंपनी हमेशा वाहन चालकों से टोल वसूलती रहती। कोर्ट ने नोएडा प्राधिकरण पर भी टिप्पणी की।

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