नौकरी की तलाश से उद्यमिता तक पहुंचे चंदन पाण्डेय, ‘वेदिका आयुर्वेद’ से खुद बने आत्मनिर्भर और पांच लोगों को दिया रोजगार
आजमगढ़ के चंदन पाण्डेय ने बेहतर नौकरी की तलाश में भटकने के बाद मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान की मदद से ‘वेदिका आयुर्वेद’ के नाम से कारोबार शुरू किया।

आजमगढ़/उत्तर प्रदेश। बेहतर नौकरी की तलाश में लंबे समय तक प्रयास करने वाले आजमगढ़ के चंदन पाण्डेय ने परिस्थितियों के आगे हार मानने के बजाय स्वरोजगार का रास्ता अपनाकर अपनी अलग पहचान बनाई है। मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान के तहत मिले आर्थिक सहयोग ने उनके इस प्रयास को मजबूती दी। आज चंदन स्वयं उद्यमी बनने के साथ ही अपने प्रतिष्ठान के माध्यम से पांच अन्य लोगों को भी रोजगार उपलब्ध करा रहे हैं।
मई खरगपुर, पोस्ट उबारपुर निवासी चंदन पाण्डेय ने परास्नातक की पढ़ाई पूरी करने के बाद डी.फार्मा की शिक्षा हासिल की। इसके बाद उन्होंने बेहतर नौकरी के लिए काफी प्रयास किए, लेकिन मनचाहा अवसर नहीं मिल सका। इसी दौरान उन्हें मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान की जानकारी मिली। उन्होंने जिला प्रशासन से योजना के बारे में जानकारी लेने के बाद पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन किया। आवेदन प्रक्रिया पूरी होने के बाद बैंक से ऋण स्वीकृत हुआ।
आर्थिक सहयोग मिलने के बाद चंदन ने नौकरी की तलाश में भटकने के बजाय अपना कारोबार शुरू करने का निर्णय लिया। उन्होंने ‘वेदिका आयुर्वेद’ के नाम से आयुर्वेदिक औषधि उद्योग की स्थापना की। कारोबार को आगे बढ़ाने के लिए उन्होंने आधुनिक मशीनें स्थापित कीं और आयुर्वेद आधारित उत्पादों का निर्माण शुरू किया।
उनकी इकाई में आंवला चूर्ण, त्रिफला चूर्ण, अश्वगंधा चूर्ण, मुरब्बा और आंवला च्यवनप्राश सहित कई आयुर्वेद आधारित खाद्य उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं। चंदन के अनुसार, उनके प्रतिष्ठान पर प्रतिदिन करीब 30 से 35 ग्राहक आयुर्वेदिक उत्पाद और औषधियां खरीदने पहुंचते हैं।
चंदन के मुताबिक, कारोबार से उन्हें करीब 35 हजार रुपये प्रतिमाह की आय हो रही है, जबकि लगभग 25 हजार रुपये तक की बचत हो जाती है। उनका वार्षिक कारोबार करीब चार से पांच लाख रुपये तक पहुंच गया है। कारोबार बढ़ने के साथ उन्होंने अपने संस्थान में पांच लोगों को रोजगार भी दिया है।
चंदन की कहानी इस बात की मिसाल है कि सरकारी योजनाओं का लाभ लेकर युवा नौकरी तलाशने वाले से रोजगार देने वाले उद्यमी बन सकते हैं। जिस योजना की मदद से उन्होंने अपने लिए रोजगार का रास्ता तैयार किया, उसी कारोबार के माध्यम से अब वह अन्य लोगों के लिए भी आजीविका का अवसर उपलब्ध करा रहे हैं।
जिलाधिकारी रविन्द्र कुमार के अनुसार, मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान युवाओं को स्वरोजगार और उद्यमिता से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। उन्होंने बताया कि आजमगढ़ में अब तक करीब छह हजार युवाओं के ऋण बैंक स्तर से स्वीकृत किए जा चुके हैं। उन्होंने युवाओं से सरकारी योजनाओं की जानकारी प्राप्त कर उनका लाभ उठाने तथा स्वरोजगार के माध्यम से स्वयं के साथ अन्य लोगों के लिए भी रोजगार के अवसर पैदा करने की अपील की।
जिलाधिकारी के अनुसार, उत्तर प्रदेश का 21 से 40 वर्ष आयु वर्ग का स्थायी निवासी और न्यूनतम आठवीं कक्षा उत्तीर्ण युवा इस योजना के तहत आवेदन कर सकता है। योजना के अंतर्गत विनिर्माण उद्योग, सेवा क्षेत्र, फ्रेंचाइजी और बिजनेस ऑन व्हील्स सहित विभिन्न क्षेत्रों में उद्यम शुरू किया जा सकता है।
योजना के तहत पांच लाख रुपये तक की उद्योग या सेवा परियोजनाओं के लिए चार वर्ष तक 100 प्रतिशत ब्याजमुक्त और बिना गारंटी ऋण की सुविधा उपलब्ध होने की जानकारी दी गई है। इसके अलावा परियोजना लागत पर 10 प्रतिशत मार्जिन मनी अनुदान का भी प्रावधान बताया गया है।
जिलाधिकारी ने कहा कि आजमगढ़ का प्रदेश में बेहतर प्रदर्शन जिला प्रशासन की पूरी टीम के सामूहिक प्रयासों का परिणाम है। उन्होंने युवाओं से अवसरों का लाभ उठाकर आत्मनिर्भर बनने और दूसरे लोगों के लिए भी रोजगार के नए अवसर पैदा करने का आह्वान किया।




