एमपी चुनाव में जीरो रहा उमा भारती का स्ट्राइक रेट, भतीजे को भी नहीं जीता पाईं

नेशनल डेस्क। मध्य प्रदेश की पूर्व सीएम उमा भारती का ग्राफ अपने ही गृह जिले में गिरता जा रहा है। इस बार चुनाव में उन्होंने टीकमगढ़, खरगापुर और पृथ्वीपुर में भाजपा प्रत्याशियों की जीत के लिए जनसभाएं की, लेकिन तीनों ही सीटों पर भाजपा प्रत्याशी हार गए। इसके पहले साल 2008 में उमा भारती को खुद टीकमगढ़ विधानसभा से हार का सामना करना पड़ा था।
दरअसल, पिछले कुछ सालों से भाजपा के शीर्ष नेतृत्व ने उमा भारती को साइड लाइन कर दिया है। इस बार विधानसभा चुनाव में उन्हें स्टार प्रचारक की सूची में शामिल भी नहीं किया गया। इसके बाद उमा भारती के प्रभाव वाली कुछ विधानसभा सीटों पर उन्हें प्रचार की जिम्मेदारी सौंपी गई। बाद में उन्हें पार्टी की ओर से हेलीकॉप्टर उपलब्ध नहीं कराया गया। जिसके चलते उन्होंने प्रचार नहीं किया।
मतदान से ठीक पहले उमा भारती अचानक टीकमगढ़ पहुंची और पृथ्वीपुर, खरगापुर सहित टीकमगढ़ में भाजपा प्रत्याशियों के समर्थन में जनसभाएं की। सभाओं के दौरान उन्होंने पिछड़ा वर्ग के लोगों को एकजुट होकर सामंती ताकतों को सत्ता से दूर करने की बात कही थी। तीनों विधानसभाओं में उमा भारती ने आधा दर्जन से ज्यादा जनसभाएं की थी, लेकिन चुनाव परिणाम आने पर टीकमगढ़, खरगापुर सहित पृथ्वीपुर में भाजपा प्रत्याशियों को हार का सामना करना पड़ा। कई लोधी बाहुल्य इलाकों में भी कांग्रेस प्रत्याशियों ने जीत दर्ज की है।
भतीजे की हार भी नहीं बचा सकी उमा भारती
उमा भारती ने इस बार लगातार तीसरी बार खरगापुर से अपने भतीजे राहुल लोधी को टिकट दिलाया था। इसके पहले 2013 और 2018 में भी उमा भारती ने भतीजे को टिकट दिलाने के लिए संगठन पर दबाव बनाया था। चुनाव से ठीक पहले राहुल लोधी को शिवराज सरकार में राज्य मंत्री भी बनाया गया। बावजूद इसके उमा भारती भतीजे को चुनाव नहीं जिता सकीं।




