राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु का अपनत्व: काफिला रुकवाकर लोगों से मिलाया हाथ, सादगी ने जीता दिल

जमशेदपुर/झारखंड। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के जमशेदपुर दौरे के दौरान सोमवार को उनकी आत्मीयता और संवेदनशीलता का एक अद्भुत नजारा देखने को मिला। एनआइटी जमशेदपुर के दीक्षांत समारोह से लौटते समय, जब घड़ी में शाम के 3:45 बज रहे थे, राष्ट्रपति ने आदित्यपुर और खरकई ब्रिज के बीच अचानक अपना काफिला रुकवा दिया। सुरक्षा प्रोटोकॉल और कड़े घेरे की परवाह किए बिना वे अपनी कार से नीचे उतरीं और घंटों से सड़क किनारे खड़ी आम जनता के बीच जा पहुंची।
चिलचिलाती धूप और उमस में अपनी दीदी की एक झलक पाने के लिए हजारों की संख्या में लोग खड़े थे। जैसे ही राष्ट्रपति उनके पास पहुंची, वहां मौजूद बुजुर्गों और महिलाओं की आंखें नम हो गई। राष्ट्रपति ने बैरिकेडिंग के बिल्कुल करीब जाकर लोगों का अभिवादन स्वीकार किया और बुजुर्गों से उनका हाल-चाल पूछा। उन्होंने वहां मौजूद बच्चों को दुलारा और उनके सिर पर हाथ फेरकर आशीर्वाद दिया। लोगों के प्रति उनके इस सहज और अपनत्व भरे व्यवहार को देख पूरा क्षेत्र भारत माता की जय और द्रौपदी मुर्मू जिंदाबाद के नारों से गूंज उठा। करीब 5 से 7 मिनट तक जनता के बीच बिताए ये पल शहर के इतिहास में एक भावुक अध्याय के रूप में दर्ज हो गए।
क्षेत्रीय कार्यक्रमों के बाद सर्किट हाउस में राष्ट्रपति ने अपनी बेटी इतिश्री और भाई तारिणीसेन के साथ अत्यंत सादगीपूर्ण भोजन किया। होटल विवांता द्वारा तैयार इस मेनू में शाही व्यंजनों के बजाय स्वास्थ्य और स्थानीय स्वाद को प्राथमिकता दी गई। उनकी थाली में रेड राइस, रागी रोटी, लौकी-टमाटर, भिंडी भुजिया और कच्चे केले के कोफ्ते जैसे पौष्टिक व्यंजन शामिल थे। मिठास के लिए पूर्वी भारत का पारंपरिक दूध पीठा, गुड़ के रसगुल्ले और झारखंड-बिहार का प्रसिद्ध ठेकुआ परोसा गया। बिना मसालों वाले सलाद और हर्बल चाय के साथ इस लंच में राष्ट्रपति की सादगी और जड़ों से जुड़ाव स्पष्ट दिखा।

 

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