बिहार में खाद्य मिलावट को लेकर राजद ने सरकार को घेरा, मछली पर रंग लगाने का वीडियो वायरल
बिहार में मिलावटखोरी पर सियासत तेज हो गई है। मछली और सब्जियों में जहरीले रंगों के खेल पर आरजेडी ने सरकार पर बड़ा हमला बोला है।

पटना,एजेंसी। बिहार में खाद्य पदार्थों में कथित मिलावट और उन्हें ताजा दिखाने के लिए रंगों के इस्तेमाल को लेकर राजनीतिक विवाद गहरा गया है। सब्जियों को हरा रंग लगाकर ताजा दिखाने के आरोपों के बीच अब मछली पर लाल रंग जैसा पदार्थ लगाने का एक वीडियो सामाजिक माध्यमों पर प्रसारित होने के बाद राष्ट्रीय जनता दल (राजद) ने राज्य सरकार पर निशाना साधा है। हालांकि, वीडियो में इस्तेमाल पदार्थ की प्रकृति और उसके स्वास्थ्य पर प्रभाव की स्वतंत्र पुष्टि सामने नहीं आई है।
राजद ने अपने आधिकारिक सामाजिक माध्यम खाते पर इस मामले को उठाते हुए खाद्य सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े किए। पार्टी ने आरोप लगाया कि बाजारों, ठेलों और भोजनालयों में खाद्य पदार्थों को आकर्षक दिखाने के लिए हानिकारक रंगों और अन्य पदार्थों का इस्तेमाल किया जा रहा है। राजद ने सरकार से पूछा कि खाद्य मिलावट रोकने और आम लोगों को सुरक्षित भोजन उपलब्ध कराने के लिए क्या प्रभावी कदम उठाए जा रहे हैं।
पार्टी ने दावा किया कि मछली को ताजा दिखाने के लिए उस पर ऐसे पदार्थों का लेप किया जा रहा है, जिनमें पारा और सीसा जैसी भारी धातुएं हो सकती हैं। राजद के अनुसार, इन धातुओं के संपर्क में आने से गुर्दे, यकृत और शरीर के अन्य अंगों को नुकसान पहुंच सकता है। हालांकि, किसी विशेष मछली या वीडियो में दिखाए गए पदार्थ में इन धातुओं की मौजूदगी की पुष्टि प्रयोगशाला जांच से ही हो सकती है।
राजद ने बिहार के विभिन्न जिलों में दूषित पेयजल की समस्या का भी मुद्दा उठाया। पार्टी का दावा है कि राज्य के 32 जिलों में आर्सेनिक और यूरेनियम जैसे तत्वों से दूषित पानी को लेकर शिकायतें सामने आती रही हैं। इसके साथ ही पार्टी ने गर्भपात और कैंसर जैसी गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं को लेकर चिंता जताई। इन दावों की व्यापकता और संबंधित स्वास्थ्य प्रभावों का आकलन आधिकारिक आंकड़ों तथा वैज्ञानिक जांच के आधार पर किया जाना जरूरी है।
खाद्य पदार्थों में कथित मिलावट को लेकर राजद ने नकली पनीर, रंग में डुबोकर बेचे जाने वाले खीरे, सब्जियों और फलों का भी उल्लेख किया। पार्टी ने दावा किया कि बाजार में बिकने वाले पनीर के बड़े हिस्से की गुणवत्ता संदिग्ध है और कुछ स्थानों पर छिले हुए खीरे को हरे रंग में डुबोकर बेचे जाने की शिकायतें मिली हैं। राजद ने दूध, ब्रेड और अन्य खाद्य उत्पादों में कथित मिलावट को लेकर भी सवाल उठाए।
पार्टी ने आरोप लगाया कि कुछ विक्रेता फलों को चमकदार दिखाने के लिए बाहरी पदार्थों का इस्तेमाल करते हैं, जबकि सब्जियों को हरा और ताजा दिखाने के लिए रंग लगाया जाता है। राजद ने यह भी दावा किया कि कच्चे फलों को जल्दी पकाने के लिए कैल्शियम कार्बाइड का इस्तेमाल किया जाता है। खाद्य सुरक्षा मानकों के विपरीत ऐसे पदार्थों का उपयोग स्वास्थ्य के लिए जोखिम पैदा कर सकता है।
इस पूरे मामले में राजद ने राज्य सरकार से खाद्य पदार्थों की नियमित जांच, संदिग्ध नमूनों की प्रयोगशाला में पड़ताल और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। हालांकि, पार्टी की ओर से लगाए गए सभी आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है। मछली पर रंग लगाने से जुड़े वीडियो की जांच और संबंधित खाद्य पदार्थों के नमूनों की वैज्ञानिक पड़ताल से ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और मिलावट का मुद्दा सीधे आम लोगों के स्वास्थ्य से जुड़ा है। ऐसे में खाद्य सुरक्षा विभाग की जिम्मेदारी है कि वह शिकायतों की जांच करे, जरूरत पड़ने पर नमूने लेकर परीक्षण कराए और जांच में गड़बड़ी सामने आने पर नियमानुसार कार्रवाई करे। राजद के आरोपों के बाद अब निगाहें इस बात पर हैं कि संबंधित अधिकारी मामले की जांच और खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए क्या कदम उठाते हैं।




