गुजरात में चांदीपुरा वायरस का खतरा: सात संक्रमित, तीन बच्चों की मौत
चांदीपुरा संक्रमण से तीन संदिग्ध मौतों के बाद, राज्य सरकार ने संभावित मामलों की पहचान और लैब रिपोर्ट तैयार करने का काम तेज कर दिया है।

गांधीनगर/एजेंसी। गुजरात में चांदीपुरा वायरस के मामलों ने चिंता बढ़ा दी है। पिछले कुछ हफ्तों में संक्रमण के सात मामलों की पुष्टि हुई है, जिनमें से तीन बच्चों की मौत हो चुकी है, जबकि चार अन्य का इलाज जारी है। राज्य के स्वास्थ्य मंत्री प्रफुल्ल पानशेरिया ने बताया कि सभी संक्रमित बच्चे 10 वर्ष से कम आयु के हैं। उन्होंने गांधीनगर में आयोजित उच्च-स्तरीय समीक्षा बैठक के बाद कहा कि आठ संदिग्ध मरीजों की जांच रिपोर्ट अभी लंबित है।
स्वास्थ्य विभाग वायरस को नियंत्रित करने, मरीजों के उपचार और निगरानी के लिए लगातार प्रयासरत है। चांदीपुरा वायरस से फ्लू जैसे लक्षणों के साथ बुखार होता है और गंभीर स्थिति में यह एक्यूट एन्सेफलाइटिस यानी मस्तिष्क में सूजन का कारण बन सकता है। यह वायरस रैब्डोविरिडे परिवार के वेसिकुलोवायरस जीनस का सदस्य है और मच्छर, किलनी तथा मक्खियों जैसे वाहकों के माध्यम से फैलता है।
स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि विभाग भारतीय चिकित्सा संघ के सहयोग से काम कर रहा है और राज्य के बाल रोग विशेषज्ञों को आपसी समन्वय के साथ इस बीमारी से निपटने के निर्देश दिए गए हैं। छोटे स्वास्थ्य केंद्रों और निजी क्लीनिकों को भी सतर्क रहने को कहा गया है। संदिग्ध मरीज मिलने पर तत्काल भर्ती कर ऑक्सीजन और वेंटिलेटर सुविधा उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि जान बचाई जा सके।
उन्होंने बताया कि वर्ष 2024 में राज्य के 61 स्थानों पर चांदीपुरा वायरस के मामले सामने आए थे, जहां मच्छरों और सैंड फ्लाई के नियंत्रण के लिए धूम्रीकरण और जागरूकता अभियान चलाए गए। इन क्षेत्रों में फिलहाल कोई नया मामला सामने नहीं आया है। नए प्रभावित इलाकों में भी तुरंत फॉगिंग, स्प्रे और सैनिटाइजेशन का कार्य शुरू कर दिया गया है।
सरकार ने सभी स्वास्थ्य केंद्रों, जिनमें प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र भी शामिल हैं, में आवश्यक दवाओं और चिकित्सा संसाधनों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की है। स्वास्थ्य विभाग ने इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के साथ मिलकर बाल रोग विशेषज्ञों के लिए दिशा-निर्देश भी जारी किए हैं और उन्हें विभागीय मुख्यालय के साथ लगातार संपर्क में रहने को कहा गया है।




