सीएजी रिपोर्ट में खुलासा: महाराष्ट्र में खाली ‘घोस्ट हॉस्टल’ पर सरकार खर्च कर रही थी करोड़ों

मुंबई/एजेंसी। महाराष्ट्र में नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (सीएजी) की ‘अनुपालन ऑडिट रिपोर्ट 2024’ में बड़ा खुलासा हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार राज्य में ऐसे 6 ‘घोस्ट हॉस्टल’ पाए गए, जहां कोई छात्र नहीं रहता था, इसके बावजूद सरकार ने वर्ष 2020 से 2024 के बीच इन पर कुल 1.62 करोड़ रुपये खर्च कर दिए।
सीएजी के मुताबिक सामाजिक न्याय और विशेष सहायता विभाग ने इन हॉस्टलों को लगातार फंड जारी रखा, जबकि वे पूरी तरह खाली थे। जालना के मोदीखान हॉस्टल में जर्जर और बंद इमारत मिली, लेकिन रिकॉर्ड में वहां 38 छात्रों और एक अधीक्षक की तैनाती दर्शाई गई थी। इस हॉस्टल पर चार वर्षों में 18 लाख रुपये मानदेय के रूप में खर्च किए गए। इसी तरह जाफराबाद के एक हॉस्टल में भी कोई छात्र नहीं मिला, जबकि दस्तावेजों में 24 छात्रों की उपस्थिति दर्ज थी।
रिपोर्ट में जालना के अलावा बुलढाणा और लातूर जिलों में भी ऐसे हॉस्टल मिलने की बात कही गई है। इसके साथ ही कई सरकारी हॉस्टलों में बुनियादी सुविधाओं की भारी कमी उजागर हुई है। छात्रों को जमीन पर बैठकर भोजन करना पड़ता था, जबकि डाइनिंग हॉल, लाइब्रेरी, कंप्यूटर लैब, सीसीटीवी, अखबार, टेलीविजन और पावर बैकअप जैसी सुविधाएं या तो नहीं थीं या बेहद सीमित थीं।
सीएजी ने यह भी पाया कि कई हॉस्टलों में नियमित मेडिकल जांच नहीं हो रही थी और पीने के पानी, साफ-सफाई तथा रोशनी की भी पर्याप्त व्यवस्था नहीं थी। कुछ स्थानों पर दिव्यांग छात्रों को ऊपरी मंजिलों पर कमरे दिए गए थे, जो नियमों के विपरीत है। 280 सरकारी हॉस्टलों में से केवल 46 में ही बायोमेट्रिक उपस्थिति प्रणाली कार्यरत पाई गई। कई हॉस्टल बिना अधीक्षक के संचालित हो रहे थे और कुछ में एक माह का राशन भंडार भी उपलब्ध नहीं था।
रिपोर्ट ने राज्य में छात्रावास व्यवस्था की निगरानी और पारदर्शिता को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।




