दिल्ली के लोकनायक अस्पताल में 17.70 करोड़ के सिक्योरिटी टेंडर पर बवाल, सरकार ने दिए जांच के आदेश
सीपीए घोटाले की जांच के बीच लोकनायक अस्पताल के 17.70 करोड़ रुपये के सुरक्षा मैनपावर टेंडर में अनियमितताओं के आरोप लगे हैं। चहेती एजेंसियों को लाभ पहुंचाने के लिए तकनीकी मूल्यांकन में गड़बड़ी की आशंका पर स्वास्थ्य विभाग ने उच्च स्तरीय जांच समिति गठित की है।

नई दिल्ली/एजेंसी। 650 करोड़ रुपये के सीपीए घोटाले की जांच के बीच अब दिल्ली सरकार के अस्पतालों में होने वाली अन्य खरीद और ठेका प्रक्रियाएं भी सवालों के घेरे में आ रही हैं। केवल केंद्रीय खरीद एजेंसी (सीपीए) ही नहीं, बल्कि अस्पताल स्तर पर जारी किए गए टेंडर भी जांच के दायरे में आ गए हैं।
लोकनायक (एलएन) अस्पताल का 17.70 करोड़ रुपये का सिक्योरिटी मैनपावर टेंडर को लेकर सवाल उठने लगे हैं। चहेती एजेंसी को लाभ पहुंचाने की नीयत से की गई तकनीकी मूल्यांकन प्रक्रिया में की गई गड़बड़ियों को लेकर बवाल इस कदर बढ़ा कि विभाग को मामले की जांच के लिए शासन स्तर से जांच समिति गठित करनी पड़ी है।
सीपीए घोटाले की जांच के दौरान कई अन्य मामलों की भी जानकारी सामने आई है, जिससे यह सवाल उठ रहा है कि क्या विभाग और अस्पतालों में ठेका तथा खरीद प्रक्रियाओं में गड़बड़ियां किसी एक इकाई तक सीमित थीं या यह समस्या व्यापक स्तर पर फैली हुई थी।
जेम (जीईएम) पोर्टल पर बिड नंबर जीईएम/2026/बी/7338438 के तहत दो अप्रैल को जारी यह टेंडर एक वर्ष के लिए सुरक्षा मैनपावर उपलब्ध कराने से संबंधित था। टेंडर की अनुमानित लागत 17 करोड़ 69 लाख 86 हजार 478 रुपये निर्धारित की गई थी।
आरोप है कि तकनीकी बोली के मूल्यांकन के दौरान कुछ एजेंसियों को लाभ पहुंचाने के लिए नियमों की अनदेखी की गई। अनुभव प्रमाण-पत्र, वार्षिक कारोबार, पात्रता शर्तों और मैनपावर से जुड़े मानकों के मूल्यांकन में गड़बड़ी का भी आरोप है। मामले की गंभीरता को देखते हुए 17 जून 2026 को स्वास्थ्य विभाग ने उच्च स्तरीय जांच समिति गठित की। समिति को पूरे टेंडर की तकनीकी मूल्यांकन प्रक्रिया की जांच कर रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं।
स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों का कहना है कि सीपीए घोटाले की जांच के दौरान कई अन्य मामलों की भी जानकारी सामने आई है। एलएन अस्पताल का यह मामला इसी वजह से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इस तरह की घटनाएं स्वास्थ्य विभाग की विभिन्न इकाइयों में टेंडर प्रक्रियाओं की निष्पक्षता और पारदर्शिता को लेकर गंभीर सवाल उठा रही हैं।




