दो साल बाद तमिलनाडु को मिला पूर्णकालिक डीजीपी,वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी महेश कुमार अग्रवाल ने संभाला पदभार
वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी महेश कुमार अग्रवाल ने तमिलनाडु के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) का पदभार संभाल लिया। वह राज्य पुलिस बल का नेतृत्व करने वाले 34वें अधिकारी बन गए हैं। उन्होंने चेन्नई के कामराजर सलाई स्थित डीजीपी मुख्यालय में कार्यभार ग्रहण किया।

चेन्नई/एजेंसी। लगभग दो साल के अंतराल के बाद, तमिलनाडु को एक नियमित पुलिस महानिदेशक और पुलिस बल का प्रमुख मिल गया है। महेश कुमार अग्रवाल ने डीजीपी का कार्यभार संभाल लिया। इससे पहले, केंद्र सरकार की एक औपचारिक अधिसूचना के माध्यम से, उन्हें बीएसएफ के साथ केंद्रीय प्रतिनियुक्ति से औपचारिक रूप से वापस बुलाया गया था। कार्यभार संभालने के तुरंत बाद, अग्रवाल ने कहा कि राज्य पुलिस महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने, नशीले पदार्थों से जुड़े अपराधों के खिलाफ कार्रवाई को मजबूत करने और पूरे राज्य में कानून-व्यवस्था बनाए रखने पर ध्यान केंद्रित करेगी। उन्होंने जनता से शांति और सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने में पुलिस के साथ सहयोग करने की भी अपील की।
महेश कुमार अग्रवाल आईपीएस की नियुक्ति हाल ही में संपन्न हुए तमिलनाडु विधानसभा चुनावों के बाद हुई है। चुनाव के दौरान भारतीय चुनाव आयोग के निर्देश पर वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी संदीप राय राठौर को तमिलनाडु पुलिस का प्रभारी अधिकारी के रूप में नियुक्त किया गया था। टीवीके के नेतृत्व में नई सरकार बनने के बाद पूर्णकालिक डीजीपी की नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू की गई।
तमिलनाडु सरकार ने राजीव कुमार, संदीप राय राठौर और महेश कुमार अग्रवाल के नामों का पैनल यूनियन पब्लिक सर्विस कमीशन को भेजा था। नई दिल्ली में हुई बैठक में यूपीएससी ने इस पैनल को मंजूरी दी, जिसके बाद राज्य सरकार ने महेश कुमार अग्रवाल को तमिलनाडु पुलिस के सर्वोच्च पद के लिए चुना। 1994 बैच के आईपीएस अधिकारी महेश कुमार अग्रवाल के पास पुलिस सेवा का तीन दशक से अधिक का अनुभव है। उन्होंने तमिलनाडु में कई महत्वपूर्ण पदों पर काम किया है।
महेश कुमार अग्रवाल पंजाब के रहने वाले है। उन्होंने कानून की पढ़ाई की है और वह एक योग्य अधिवक्ता (वकील) भी हैं। उन्हें तमिल, अंग्रेजी, हिंदी और पंजाबी भाषाओं का अच्छा ज्ञान है। अपने पूरे करियर में उन्होंने कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाली हैं और आधुनिक पुलिसिंग तथा अपराध रोकथाम पर विशेष ध्यान दिया है।
महेश कुमार अग्रवाल का जन्म पंजाब के बठिंडा में हुआ था। वह यहीं पले-बढ़े और पढ़ाई की। उन्होंने 1994 में यूपीएससी क्रैक किया। उनके पिता पंजाब के नाम वकील प्रकाश चंद अग्रवाल थे। उनकी मां का नाम जनाकी देवी है। महेश कुमार अग्रवालकी स्कूलिंग एमएचआर, एमएसडी स्कूल और राजिंदर कॉलेज से हुई है। महेश कुमार अग्रवाल को तमिलनाडु कैडर मिला उनकी पहली नियुक्ति एएसपी नागनेरी की पोस्ट पर हुई। तब वह महज 22 साल के थे। वह चेन्नई में 4 साल तक डीसीपी लॉ एंड क्राइम रहे। तूतीकोरिन के एसपी रहे। वह डेप्युटेशन पर चंडीगढ़ आए और यहां सीबीआई ऑफिस में 7 साल तक डीआईजी रहे। इस दौरान उनके पास चंडीगढ़, पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर का प्रभार रहा। महेश कुमार अग्रवाल ने चेन्नई में तीन वर्षों तक पुलिस उपायुक्त (डीसीपी) के रूप में काम किया। इसके अलावा वह चेन्नई में ट्रैफिक डीसीपी और तूतीकोरिन जिले के पुलिस अधीक्षक (एसपी) भी रह चुके हैं। चेन्नई में सीसीटीवी निगरानी नेटवर्क के विस्तार में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। माना जाता है कि इससे शहर में अपराधों का पता लगाने और सार्वजनिक सुरक्षा को मजबूत करने में मदद मिली।
उन्होंने ‘नाइट क्राइम टू जीरो’ पहल भी शुरू की थी, जिसका उद्देश्य रात के समय होने वाले अपराधों को कम करना था। महेश कुमार अग्रवाल ने कई बड़े और चर्चित मामलों की जांच और निगरानी की है। इनमें चर्चित सेलम ट्रेन डकैती मामला भी शामिल है। उत्कृष्ट सेवाओं के लिए उन्हें मुख्यमंत्री उत्कृष्ट सेवा पदक से भी सम्मानित किया जा चुका है। उनकी नियुक्ति तमिलनाडु पुलिस में एक नए अध्याय की शुरुआत मानी जा रही है। उम्मीद की जा रही है कि उनका व्यापक अनुभव और तकनीक आधारित पुलिसिंग पर जोर राज्य में कानून-व्यवस्था और सार्वजनिक सुरक्षा को और मजबूत करेगा।
महेश कुमार अग्रवाल, जो तमिलनाडु कैडर के 1994-बैच के आईपीएस अधिकारी हैं, केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के विशेष महानिदेशक के रूप में कार्यरत थे। राज्य में उनकी वापसी कैबिनेट की नियुक्ति समिति की मंजूरी के बाद हुई, जिसने गृह मंत्रालय के उस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी, जिसमें उन्हें तत्काल प्रभाव से तमिलनाडु कैडर में वापस भेजने की बात कही गई थी। अपने करियर के दौरान, अग्रवाल ने राज्य पुलिसिंग और केंद्रीय अर्धसैनिक प्रशासन दोनों में विभिन्न पदों पर कार्य किया है। उनकी नियुक्ति ऐसे समय में तमिलनाडु पुलिस के शीर्ष पद पर हुई है, जब विभाग अपराध की रोकथाम, नशीले पदार्थों के खिलाफ कार्रवाई और सार्वजनिक सुरक्षा पर विशेष ध्यान दे रहा है।





