साइबर धोखाधड़ी उजागर करने वाले दो भारतीय पत्रकारों ने जीता पुलित्जर पुरस्कार

दो भारतीय पत्रकारों, आनंद आरके और सुपर्णा शर्मा ने प्रतिष्ठित पुलित्जर पुरस्कार जीता है। उन्हें डिजिटल निगरानी और साइबर धोखाधड़ी को उजागर करने के लिए यह सम्मान मिला।

नेशनल डेस्क। दो भारतीय पत्रकारों ने पत्रकारिता क्षेत्र के प्रतिष्ठित पुलित्जर पुरस्कार जीतकर बड़ी उपलब्धि हासिल की है। आनंद आरके और सुपर्णा शर्मा को डिजिटल निगरानी और साइबर धोखाधड़ी उजागर करने के लिए इस पुरस्कार से सम्मानित किया गया है।
पुलित्जर पुरस्कारों की घोषणा सोमवार को हुई।आनंद और सुपर्णा को इलस्ट्रेटेड रिपोर्टिंग एंड कमेंट्री श्रेणी में यह सम्मान मिला है। उन्होंने इस पुरस्कार को ब्लूमबर्ग की नताली ओबिको पियर्सन के साथ साझा किया है। पुलित्जर पुरस्कार की वेबसाइट के अनुसार, ‘ट्रैप्ड” शीर्षक से ब्लूमबर्ग के लिए तैयार की गई यह खबर भारत की एक न्यूरोलाजिस्ट की सहमा देने वाली कहानी बयां करती है, जिन्हें डिजिटल अरेस्ट किया गया था। तस्वीरों और शब्दों के अनूठे मिश्रण से तैयार इस खबर ने डिजिटल निगरानी और साइबर धोखाधड़ी के बढ़ते वैश्विक खतरे को बेहद प्रभावशाली तरीके से उजागर किया।
अमेरिका की कोलंबिया यूनिवर्सिटी की ओर से संचालित पुलित्जर पुरस्कार को पत्रकारिता, साहित्य और संगीत रचना के क्षेत्र में दिए जाने वाले सर्वोच्च सम्मानों में गिना जाता है। चीन पर खोजी रिपार्टिंग के लिए एपी को पुरस्कारएपी के अनुसार, चीन में सरकारी निगरानी और इसमें अमेरिकी टेक कंपनियों की भूमिका को लेकर अपनी खोजी खबरों के लिए एसोसिएटेड प्रेस (एपी) ने इंटरनेशनल रिपोर्टिंग के लिए पुलित्जर पुरस्कार जीता है। एपी के पत्रकारों डेक कांग, गैरांस बर्क, बायरन ताउ, अनिरुद्ध घोषाल और स्वतंत्र पत्रकार येल ग्राउर को पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
ट्रंप को लेकर रायटर ने जीते दो पुस्काररायटर के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के राजनीतिक बदले से जुड़े अभियान और इंटरनेट मीडिया की दिग्गज कंपनी मेटा के जान-बूझकर अपने यूजर्स को नुकसान पहुंचाने वाले एआइ चैटबाट्स और धोखाधड़ी संबंधी विज्ञापनों की रिपोर्टिंग के लिए रायटर ने दो पुलित्जर पुरस्कार जीते हैं।

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