होर्मुज स्ट्रेट दोबारा बंद होने से कारोबारी परेशान, गुरुग्राम से एक्सपोर्ट होने वाला 900 करोड़ का सामान फंसा

होर्मुज स्टेट के फिर बंद होने से गुरुग्राम के निर्यातकों की मुश्किलें बढ़ गई है। उनका 900 करोड़ रुपये का सामान फंस गया है। शिपमेंट रुकने से सप्लाई चेन, पेमेंट और नए ऑर्डर्स पर असर पड़ रहा है।

गुरुग्राम/हरियाणा। ईरान की ओर से शुक्रवार को होर्मुज जलडमरू मध्य को खोलने की घोषणा के बाद कारोबारियों को जो राहत मिली थी, वो लंबे समय तक नहीं रह पाई। शनिवार को फिर ईरान ने स्ट्रेट को बंद कर दिया। इससे कारोबारियों का राहत का इंतजार फिर बढ़ गया है। जानकारी के अनुसार गुरुग्राम से एक्सपोर्ट होने वाला करीब 900 करोड़ रुपये का सामान कमर्शल शिपिंग और लॉजिस्टिक्स प्रभावित होने की वजह से फंसा हुआ है। इसमें से 400 करोड़ रुपये के केवल गार्मेंट्स हैं। साथ ही ऑटो पार्ट्स, आईटी और इलेक्ट्रॉनिक्स हार्डवेयर, मशीनरी, इंजीनियरिंग गुड्स और फार्मास्युटिकल प्रॉडक्ट्स भी शामिल हैं, जिनका एक्सपोर्ट प्रभावित हो रहा है।
निर्यातकों के अनुसार उनकी सबसे बड़ी समस्या पोर्ट और फैक्ट्रियों में फंसे माल की है। रूट बंद रहने और शिपमेंट रुकने के कारण बड़ी मात्रा में कंटेनर बंदरगाहों और गोदामों में अटक गए। इससे सप्लाई चेन प्रभावित हुई और नए ऑर्डर्स की डिलीवरी भी समय पर नहीं हो पाई। शिपमेंट में देरी का असर सीधे ऑर्डर और पेमेंट साइकल पर भी पड़ा है।
गुरुग्राम चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के जनरल सेक्रेटरी एसके आहुजा का कहना है कि विदेशी खरीदारों ने देरी के चलते कुछ ऑर्डर्स को होल्ड पर डाल दिया है। वहीं जिन शिपमेंट्स में देरी हुई है, उनके पेमेंट के अटकने की जानकारी मिल रही है। इससे उद्यमियों की वर्किंग कैपिटल पर दबाव बढ़ा है और नए ऑर्डर्स को लेने में परेशानी आ रही है।
गारमेंट एक्सपोर्टर्स एंड मैन्युफैक्चरर्स असोसिएशन के जनरल सेक्रेटरी अनिमेश सक्सेना का कहना है कि जब तक होर्मुज रूट पूरी तरह सामान्य रूप से चालू नहीं हो जाता और शिपिंग लाइनें अपनी नियमित सेवाएं बहाल नहीं कर देतीं, तब तक राहत की स्थिति नहीं मानी जा सकती।

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