दोनों हाथ शिथिल होने के बाद भी पैरों से लिख 12वीं में किया टॉप
छात्रा का सम्मान करने खुद गईं थी कलेक्टर, पिता हैं मजदूर

मध्य प्रदेश के मंडला जिले की एक छात्रा ने 12वीं क्लास में 65 फीसदी अंक हासिल किए हैं। छात्रा के दोनों हाथ शिथिल हैं जिस कारण से वह पैरों से लिखती है।
मंडला/मध्य प्रदेश। हाल ही में मध्य प्रदेश में 10वीं और 12वीं क्लास का रिजल्ट घोषित किया गया है। छात्रा द्रौपदी ने पैरों से लिखकर 65 प्रतिशत अंक हासिल किए हैं। करीब दो साल पहले छात्रा द्रोपदी ने 10वीं की बोर्ड परीक्षा में पैरों से लिखकर प्रथम स्थान प्राप्त किया था। उस दौरान मंडला की तत्कालीन कलेक्टर डॉ सलोनी सिडाना खुद छात्रा से मुलाकात करने के लिए उसके गांव गईं थीं और उसे पढ़ाई के लिए मोटिवेट किया था। तत्कालीन कलेक्टर ने द्रोपदी का सम्मान किया था और उसका उत्साहवर्धन भी किया था। कलेक्टर से मिलने के बाद द्रौपदी ने अपनी आगे की पढ़ाई जारी रखने का फैसले किया था। उस समय द्रौपदी ने कलेक्टर से कहा था कि वह आगे पढ़ाई करेगी और भविष्य में एक अफसर बनकर समाज की सेवा करेगी।
द्रौपदी भीमडोगरी स्कूल की छात्रा है। 12वीं की परीक्षा में 65 प्रतिशत अंक हासिल कर उसने सबको हैरान कर दिया है। जन्म से दोनों हाथों के शिथिल होने के कारण द्रोपदी पैरों से लिखती है, लेकिन उसके हौसले किसी भी बाधा से कहीं ऊंचे हैं। छात्रा के परिजनों ने भी बेटी की कुशलता को देखने हुए उसकी पढ़ाई आगे जारी रखने का फैसला किया।
द्रौपदी धुर्वे मवई विकासखंड के करौंदा टोला की रहने वाली है। छात्रा दोनों हाथ से दिव्यांग है। बावजूद इसके उसके जज्बे से उसका अध्ययन जारी हैं। वह अपने पैरों में पेन फंसाकर लिखती है। छात्रा के दोनों हाथ जन्म से ही शिथिल हैं। उसके हाथों में इतनी जान भी नहीं की वह पेन तक उठा सके। लेकिन उसके अंदर पढ़ने की इच्छा थी जिस कारण से उसने पैरों से लिखने की शुरुआत की।
उसके हौसले और शिक्षा के लिए उसकी लग्न ने उसे पैर से लिखने की कला में पारंगत कर दिया है। पैरों से लिखने की कला में उसकी स्कूल टीचर चंद्रकला मरकाम का बड़ा रोल रहा। द्रौपद्री के बारे में स्कूल के प्राचार्य ने बताया कि वह स्कूल हमेशा आती है। छात्रा का जन्म गरीब आदिवासी परिवार में हुआ है। उसके पिता बीरबल धुर्वे गरीबी के कारण जरूरी सुविधाएं नहीं दे पाते हैं। छात्रा का परिवार मजदूरी करने अपना जीवन यापन करता है।




