‘भ्रष्टाचार पर वार’ से सत्ता पर प्रहार की रणनीति पर भाजपा

क्या घोटालों की गूंज बदल देगी बंगाल की राजनीति?

कोलकाता/एजेंसी। बंगाल की सियासत में भ्रष्टाचार एक बार फिर केंद्रीय मुद्दा बनकर उभरा है। भाजपा इसे विधानसभा चुनाव में अपने सबसे धारदार और निर्णायक हथियार के रूप में पेश कर रही है। पिछले कुछ वर्षों में सामने आए घोटालों और भ्रष्टाचार के मामलों को पार्टी महज आरोपों तक सीमित नहीं रख रही, बल्कि इन्हें “व्यवस्था परिवर्तन” की अनिवार्यता से जोड़ते हुए जनता के बीच एक व्यापक राजनीतिक नैरेटिव में बदल रही है। बीते चार-पांच वर्षों में सामने आए विभिन्न मामलों में सत्तारूढ़ दल तृणमूल कांग्रेस के कई नेताओं की गिरफ्तारी ने इस मुद्दे को और धार दी है।
शिक्षक भर्ती और पालिका भर्ती घोटालों में रिश्वत लेकर अयोग्य उम्मीदवारों की नियुक्ति के आरोप लगे, जबकि राशन घोटाले में गरीबों के हिस्से का अनाज बाजार में बेचने की बात सामने आई। वहीं कोयला और मवेशी तस्करी जैसे मामलों को भी भाजपा संगठित भ्रष्टाचार की मिसाल के तौर पर उछाल रही है। भाजपा इन सभी मामलों को एक व्यापक संदेश में पिरो रही है यानी “भ्रष्टाचार के खिलाफ निर्णायक लड़ाई” और “व्यवस्था परिवर्तन की जरूरत”। भाजपा एक ओर टीएमसी सरकार पर सीधे हमले कर रही है तो दूसरी ओर केंद्रीय एजेंसियों की कार्रवाई को भ्रष्टाचार के खिलाफ निर्णायक लड़ाई के रूप में प्रचारित कर रही है। पार्टी के शीर्ष नेता लगातार रैलियों, प्रेस कांफ्रेंस और इंटरनेट मीडिया के जरिए यह संदेश देने की कोशिश कर रहे हैं कि बंगाल में भ्रष्टाचार अब संस्थागत रूप ले चुका है। सत्ताधारी दल के मंत्री, नेता इनमें प्रत्यक्ष रूप से जुड़े पाए गए हैं। हाल में बंगाल के दौरे पर आए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह समेत अन्य वरिष्ठ नेताओं ने अपने भाषणों में भ्रष्टाचार के मुद्दे पर सबसे ज्यादा जोर दिया।
मुद्दे को आम जनता से जोड़ने की कोशिश
भाजपा का मानना है कि केवल आरोपों से चुनाव नहीं जीते जाते। इसलिए वह भ्रष्टाचार के मुद्दे को आम जनता के रोजमर्रा के जीवन से जोड़ने की कोशिश कर रही है। पार्टी यह नैरेटिव बना रही है कि भ्रष्टाचार ने अवसर छीन लिए हैं। इस भावनात्मक अपील को वह चुनाव में असरदार बनाने में जुटी है। रवींद्र भारती विश्वविद्यालय के प्रोफेसर बिश्वनाथ चक्रवर्ती का मानना है कि बंगाल की आगामी चुनावी लड़ाई में भ्रष्टाचार एक केंद्रीय मुद्दा बना रहेगा। भाजपा इसे अपने सबसे तेज हथियार के रूप में इस्तेमाल कर रही है, लेकिन इसकी धार कितनी प्रभावी साबित होगी, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि वह जनता को कितनी मजबूती से यह यकीन दिला पाती है कि बदलाव वास्तव में जरूरी है और संभव भी।
डबल इंजन के फार्मूले को नए सिरे से रख रही है सामने
बंगाल में भाजपा डबल इंजन सरकार के अपने पुराने फार्मूले को भी नए सिरे से सामने रख रही है। भाजपा यह संदेश देना चाहती है कि मौजूदा सरकार न केवल भ्रष्ट है, बल्कि विकास में भी बाधक है। हालांकि वहीं टीएमसी इन आरोपों को राजनीतिक बदले की कार्रवाई करार दे रही है और भाजपा पर केंद्रीय एजेंसियों के दुरुपयोग का आरोप लगा रही है।

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