रूस से तेल खरीदने के लिए अमेरिका ने भारत से की थी अपील, अमेरिकी अधिकारी ने मानी बात

अंतर्राष्ट्रीय डेस्क। पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य तनाव के बीच वैश्विक तेल बाजार को स्थिर रखने के लिए अमेरिका ने भारत से रूसी कच्चा तेल खरीदने का आग्रह किया था। अमेरिकी ऊर्जा मंत्री क्रिस राइट ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि यह एक अल्पकालिक और व्यावहारिक कदम था, जिसका उद्देश्य संभावित आपूर्ति संकट और कीमतों में उछाल को रोकना था।
गौरतलब है कि पिछले सप्ताह अमेरिका ने कहा था कि उसने भारत को उन रूसी तेल कार्गो को खरीदने की अनुमति दी है, जो पहले से समुद्र में मौजूद हैं। यह अनुमति 30 दिन के लिए दी गई थी। इस बयान के बाद भारत में राजनीतिक बहस तेज हो गई थी। विपक्षी दलों ने सरकार से स्पष्टीकरण मांगा था कि क्या रूस से तेल खरीदने के मामले में भारत अमेरिकी दबाव के तहत निर्णय ले रहा है।
प्रेट्र के अनुसार, सीएनएन को दिए साक्षात्कार में राइट ने बताया कि उन्होंने अमेरिकी वित्त मंत्री स्काट बेसेंट के साथ मिलकर भारतीय अधिकारियों से संपर्क किया था। उनसे आग्रह किया गया था कि समुद्र में पहले से मौजूद रूसी तेल के कार्गो को भारतीय रिफाइनरियों में उतार लिया जाए, जो मूल रूप से चीन की रिफाइनरियों के लिए निर्धारित थे।राइट ने कहा कि एशिया के समुद्री मार्गों में बड़ी मात्रा में रूसी तेल से भरे टैंकर खड़े थे और चीन के बंदरगाहों पर उन्हें उतारने में कई सप्ताह लग सकते थे।
ऐसे में इन कार्गो को भारत की रिफाइनरियों तक मोड़ने से वैश्विक बाजार में तेल की उपलब्धता तेज हो सकती थी और कीमतों में अचानक उछाल की आशंका कम हो सकती थी।राइट ने स्पष्ट किया कि इस कदम का मतलब रूस के प्रति अमेरिकी प्रतिबंध नीति में किसी प्रकार का बदलाव नहीं है। उन्होंने कहा कि यह केवल अस्थायी और व्यावहारिक निर्णय था, जिससे बाजार में स्थिरता लाई जा सके। उन्होंने कहा कि भारत इस स्थिति को अच्छी तरह समझता है और यह व्यवस्था केवल सीमित अवधि के लिए की गई थी।
संयुक्त राष्ट्र में अमेरिका के राजदूत माइक वाल्ट्ज ने भी इस निर्णय का बचाव करते हुए कहा कि यह केवल अस्थायी व्यवस्था है। उनके अनुसार समुद्र में पहले से मौजूद लाखों बैरल तेल को भारतीय रिफाइनरियों तक पहुंचाने से वैश्विक बाजार में आपूर्ति बढ़ेगी और कीमतों पर दबाव कम होगा। अमेरिकी वित्त मंत्रालय के अनुसार यह लाइसेंस केवल उन रूसी तेल कार्गो के लिए लागू है जो पांच मार्च से पहले जहाजों पर लादे जा चुके थे। इन्हें भारत के बंदरगाहों पर चार अप्रैल तक उतारने की अनुमति दी गई है।

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