ईरान पर हमले की तैयारी में अमेरिका, इजरायल में तैनात हुआ एफ-22 लड़ाकू विमान

अंतर्राष्ट्रीय डेस्क। अमेरिका ने मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच अहम सैन्य कदम उठाया है। पहली बार, अमेरिकी सेना ने अपने F-22 रैप्टर लड़ाकू विमानों को इजरायली सैन्य अड्डे पर तैनात किया है। यह कदम ईरान से संभावित खतरे के खिलाफ इजरायल और अमेरिकी हितों की रक्षा करने का हिस्सा माना जा रहा है। अमेरिका ने इस क्षेत्र में युद्धपोतों और विमानों की बड़ी तैनाती को बनाए रखा है।
‘द वॉल स्ट्रीट जर्नल’ की रिपोर्ट के अनुसार यह तैनाती अमेरिका की लंबे समय से चली आ रही नीति में महत्वपूर्ण परिवर्तन है। पहले इस क्षेत्र की संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए अमेरिका ने इजरायल में अपनी सैन्य उपस्थिति को सीमित रखा था।
अमेरिका के एक पूर्व सीनियर अधिकारी डेनिस रॉस ने इस कदम की अहमियत बताते हुए कहा, ‘इजरायली बेस से एयरक्राफ्ट ऑपरेट करना पहली बार है। यह निर्णय क्षेत्र में अन्य देशों से सामना की जा रही चुनौतियों के कारण लिया गया।
बता दें , सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात ने सैन्य अभियानों के लिए अपने हवाई क्षेत्र के उपयोग की अनुमति देने से इनकार कर दिया, जिससे अमेरिका के विकल्प सीमित हो गए। फ्लाइट ट्रैकिंग डेटा से पता चला कि ये जेट 24 फरवरी को ब्रिटेन के लैकेनहीथ एयरबेस से इजरायल के लिए रवाना हुआ था। इजरायली अधिकारी मानते हैं कि ईरान पर अमेरिकी हमल जरुरी हो सकता है।
यह पूरी घटना ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर अमेरिका-ईरान वार्ताओं के बीच हो रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने सांसद को संबोधित करते हुए चेतावनी दी, ‘उन्होंने पहले ही ऐसी मिसाइलें बना ली हैं जो यूरोप और विदेशों में हमारे बेस के लिए खतरा बन सकती हैं, और वे ऐसी मिसाइलें बनाने पर काम कर रहे हैं जो जल्द ही यूनाइटेड स्टेट्स ऑफ़ अमेरिका तक पहुंच जाएंगी।’
उन्होंने दोहरी रणनीति दोहराते हुए कहा, ‘मेरी पसंद इस प्रॉब्लम को डिप्लोमेसी के ज़रिए हल करना है, लेकिन एक बात पक्की है मैं दुनिया के नंबर एक टेरर स्पॉन्सर को कभी भी न्यूक्लियर वेपन नहीं रखने दूंगा।’ बता दें, ईरान के विदेश मंत्रालय ने जिनेवा वार्ताओं को “बहुत कंस्ट्रक्टिव” बताया है।

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