जम्मू-कश्मीर में क्यों बढ़ने लगे सड़क हादसे? 10 जवानों के बलिदान ने खड़े किए सवाल, 2022 से अबतक 3600 से ज्यादा मौतें

जम्मू/एजेंसी। केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर में वीरवार को सड़क हादसे में दस सैनिकों के बलिदान ने सड़क सुरक्षा को लेकर फिर एक बड़ा सवाल पैदा कर दिया। जून 2022 के बाद अब तक जम्मू कश्मीर में हुई 20135 सड़क दुर्घटनाओं में 3688 लोगों की मौत हुई है। सड़कों हादसों में से करीब 50 प्रतिशत सड़क हादसों के लिए तेज रफ्तार व लापरवाही से ड्राइविंग जिम्मेदार है।
प्रदेश में पिछले करीब साढ़े तीन सालों में सड़क हादसों में 29,131 लोग गंभीर या मामूली रूप से घायल हुए हैं। इन सड़क हादसों में करीब 32,819 लोग प्रभावित हुए हैं। इंटरेगरेटेड रोड़ एक्सीडेंट डेटाबेस (आइआरएडी) व इ डिटेल एक्सीडेंट रिपोर्ट (इडीएआर) पोर्टलों के आंकड़ों के अनुसार अधिकांश दुर्घटनाएं प्रमुख जम्मू, कठुआ, उधमपुर व राजौरी जिलों में राष्ट्रीय राजमार्गों पर हुईं हैं।
अधिकतर दुर्घटनाएं दोपहर 3 बजे से रात 9 बजे के बीच हुईं, व 2025 में दर्ज लगभग 50 प्रतिशत दुर्घटनाओं का कारण तेज रफ्तार व लापरवाही से ड्राइविंग करना था।
वीरवार को जम्मू में मुख्य सचिव अटल डुल्लू ने प्रदेश में सड़कों हादसों की स्थिति, उन्हें रोकने के लिए की जा रही कार्रवाई की समीक्षा की। उन्होंने जम्मू कश्मीर में जीआईएस, डेटा आधारित सड़क सुरक्षा उपायों को प्रभावी बनाकर सड़क हादसों में कमी लाने पर बल दिया। सड़क सुरक्षा उपायों को लेकर उच्चतम न्यायलयों के निर्देशों पर बैठक में मुख्यसचिव ने कहा कि जिलों में जीआईइएस आधारित तकनीक से सड़कों के ऐसे खंडों की पहचान की जा सकती है, यहां पर अधिक दुर्घटनाएं होती हैं। इसके बाद तकनीकी व भौतिक हस्तक्षेप से वहां पर सड़क दुर्घटनाओं में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकती है। बैठक में संबंधित विभागों के प्रशासनिक सचिव, यातायात पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने हिस्सा लिया। वहीं विभिन्न जिलों के डिप्टी कमिश्नरों ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से इस बैठक में भाग लिया। मुख्य सचिव ने बैठक में उच्चतम न्यायालय के सड़क सुरक्षा संबंधी निर्देशों व उनके अनुपालन की स्थिति पर विस्तार से जानकारी मांगी। उन्होंनें जोर दिया कि उच्चतम न्यायालय के हर निर्देश के क्रियान्वयन के लिए जल्द स्पष्ट व समयबद्ध कार्य योजना बनाई जाए। उन्होंने परिवहन व यातायात डेटा का उपयोग करते हुए लक्षित सुरक्षा उपायों, यातायात पुलिस की रणनीतिक तैनाती व ऐसे स्थानों पर इंजीनियरिंग सुधारों करने पर जोर दिया यहां पर बार बार दुर्घटनाएं होती हैं।
सड़क दुर्घटनाओं की स्थिति की समीक्षा
सड़क सुरक्षा में कमी लाने के लिए निवारक कार्रवाई पर जोर देते हुए मुख्य सचिव ने कहा कि आदतन व गंभीर यातायात उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कड़ी दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि तेज रफ्तार, लापरवाह ड्राइविंग एवं यातायात नियमों के उल्लंघन पर ड्राइविंग लाइसेंस, पंजीकरण प्रमाणपत्र रद्द करने के साथ वैधानिक कार्रवाई हो।
बैठक में पोर्टल पर उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर जम्मू-कश्मीर की सड़क दुर्घटनाओं की स्थिति की भी समीक्षा की गई। इसके साथ दुर्घटनाओं के समय, मासिक प्रवृत्तियों, जिला-वार वितरण, सड़कों के वर्गीकरण तथा दुर्घटनाओं के प्रमुख कारणों का विश्लेषण किया गया। बैठक में सड़क निर्माण एजेंसियों को ब्लैक स्पाट प्रोटोकाल के अनुसार चिन्हित दुर्घटना स्थलों में निवारक कार्रवाई के साथ ट्रैफिक उपायों, सुरक्षा संकेतक लगाने व स्कूली बसों में स्पीड लिमिटिंग डिवाइस लगाने की प्रगति की भी समीक्षा की गई।
परिवहन विभाग की सचिव अवनी लवासा ने आइआरएडीव इडीएआर पोर्टलों के संचालन पर विस्तृत प्रस्तुति दी। उन्होंने बताया कि वर्ष 2024 में 40,197 चालान व 2025 में 52,543 चालान काटे गए। इनसे 10.15 करोड़ रुपये व 15.88 करोड़ रुपये का जुर्माना वसूला गया।
प्रमुख उल्लंघनों में हेलमेट न पहनना, सीट बेल्ट का उपयोग न करना, मोबाइल फोन पर बात करते हुए वाहन चलाना, ओवरस्पीडिंग व रेड लाइट जंप करना शामिल है। वर्ष 2025 में 1,528 वाहन जब्त, 1,641 ड्राइविंग लाइसेंस निलंबित, 10,439 वाहन ब्लैकलिस्ट, 1192 पंजीकरण प्रमाणपत्र रद्द व 300 रूट परमिट निरस्त किए गए। इस अवसर पर आईजीपी ट्रैफिक एम सुलेमान ने जम्मू और श्रीनगर के प्रमुख चौराहों पर इंटीग्रेटेड ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम और इंटेलिजेंट लाइट ट्रैफिक सिस्टम के तहत लगाए गए निगरानी कैमरों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यातायात पुलिस द्वारा 2023 में 12,36,380, 2024 में 15,03,901 व 2025 में 14,92,591 इ-चालान जारी किए गए। इससे 85.16 करोड़, 120.09 करोड़ व 145.12 करोड़ रुपये का जुर्माना वसूला गया। वर्ष 2025 में 15,947 वाहनों को विभिन्न मोटर वाहन अधिनियम उल्लंघनों के तहत जब्त किया गया।

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