दिल्ली में नकली प्रीमियम मोबाइल गिरोह का भंडाफोड़,चार आरोपितों को किया गिरफ्तार

512 फर्जी सैमसंग फोन बरामद, चीन से मंगवाते थे पार्ट्स

नई दिल्ली। आज के दौर में महंगे प्रीमियम मोबाइल फाेन रखने का क्रेज नौजवानों में बढ़ता जा रहा है। लोग इसके लिए मोटी रकम खर्चकर मोबाइल फोन खरीदते हैं, लेकिन दिल्ली में कुछ गिरोह ऐसे भी सक्रिय हैं जो महंगे प्रीमियम मोबाइल की आड़ में नकली मोबाइल फोन का धंधा चला रहे हैं। मध्य जिले की स्पेशल स्टाफ की टीम ने एक ऐसे ही गिरोह का भंडाफोड़ किया है जो सैमसंग के नकली प्रीमियम फोन बनाकर देशभर में बेच रहे थे।
पुलिस ने इस संबंध में चार आरोपितों को गिरफ्तार किया है। इनकी पहचान गिरोह के मुख्य सरगना अशोक विहार के हाकिम, इंद्र विहार ब्रिजपुरी के मेहताब अहमद अंसारी, बुद्ध विहार, रोहिणी के रवि आहूजा और करोल बाग के राहुल के रूप में हुई है। पुलिस को इनके गिरोह के बाकी सदस्यों की तलाश है। पुलिस इस बात का पता लगा रही है कि आरोपित किन-किन लोगों को यह मोबाइल फोन बेच रहे थे। सभी से पूछताछ जारी है।
पुलिस ने आरोपितों के पास से 512 नकली प्रीमियम महंगे फोन (एस-25 अल्ट्रा, फोल्ड व फिलिप), 124 मदरबोर्ड, 138 बैटरी और वियतनाम की मोहर लगे 459 आईएमईआई नंबर के स्टीकर बरामद किए हैं। आरोपित चीन से मोबाइल के नकली पार्ट्स मंगवाते थे। इसके बाद इन मोबाइल को 35 से 40 हजार या उससे ज्यादा कीमत में बेच दिया जाता था। आरोपित करोल बाग के अलावा देश के अलग-अलग हिस्सों में नकली मोबाइल फोन बेच रहे थे। मध्य जिला के पुलिस उपायुक्त निधिन वल्सन के मुताबिक, 13 दिसंबर को स्पेशल स्टाफ की टीम को सूचना मिली थी कि करोल बाग के बीडनपुरा स्थित एक दुकान पर सैमसंग के नकली प्रीमियम मोबाइल फोन असेंबल करके बेचे जा रहे हैं। इसके अलावा आरोपित चोरी के मोबाइल फोन भी खरीद रहे हैं।
जानकारी मिलने के बाद इंस्पेक्टर रोहित कुमार के नेतृत्व में टीम गठित की गई। 13 दिसंबर की रात को ही दुकान पर छापेमारी की गई। टीम ने दुकान से मास्टरमाइंड हाकिम के अलावा उसके करीबी मेहताब अहमद अंसारी के अलावा दो अन्य युवक रवि आहुजा व राहुल को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ के दौरान इन लोगों ने अपना अपराध कुबूल कर लिया।
पहले भी नकली मोबाइल फैक्ट्री का किया था भंडाफोड़
इससे पहले बीते माह 28 नवंबर को दिल्ली पुलिस ने करोल बाग के मोबाइल हब में फर्जी मोबाइल फैक्ट्री का भंडाफोड़ करते हुए पांच आरोपितों को गिरफ्तार किया था और उनके पास से 1,826 मोबाइल फोन बरामद किए थे। यह गैंग चाइनीज साफ्टवेयर और आइएमईआइ नंबर बदलकर पुराने मोबाइलों को नए फोन की तरह बाजार में सप्लाई करता था। बरामद मोबाइल फोन नान-ट्रेसेबल चाइनीज आईएमईआई नंबरों से लैस थे यानी ऐसे मोबाइल जिन्हें ट्रैक करना बेहद मुश्किल होता है।

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