प्राइवेट पार्ट में भर लेता है, खा लेता है 10 किलो मिर्च, नहीं गिरता एक बूंद आंसू
मेघालय का राम दुनिया का गजब इंसान

मेघालय। मेघालय के घने जंगलों और पहाड़ियों से एक अनोखी कहानी सामने आई है, जिसने सोशल मीडिया पर सबका ध्यान खींचा है। पूर्वी जयंतिया हिल्स जिले के बटाव गांव के एक साधारण किसान राम पिरतुह ने अपनी असाधारण क्षमताओं के लिए दुनिया भर में ख्याति प्राप्त की है। मेघालय के राम पिरतुह आंसू, पसीने या ज़रा सी भी तकलीफ़ के बिना एक ही बार में 10 किलो से ज़्यादा सूखी मिर्च शांति से खा सकते हैं। राम की दुनिया भर में चर्चा है। हाल ही में वह एक बार फिर चर्चा में हैं। उनकी कई तस्वीरें और वीडियो क्लिप सामने आए हैं, जिसमें वह सूखी मिर्च खाते नजर आ रहे हैं। कुछ ऑनलाइन पोस्ट्स में तो यहां तक दावा किया गया कि राम मिर्च को ऐसे बर्दाश्त कर सकता है जैसा कोई और बर्दाश्त नहीं कर सकता।
स्थानीय लोग कई ऐसे मौके याद करते हैं जब राम की परीक्षा ली गई। उसे मिर्च के लेप से नहलाया गया, उसे मिर्च से लथपथ किया गया और यहां तक कि उसे लगातार कच्ची मिर्च खाने की हिम्मत भी हुई, फिर भी उसने दर्द का कोई लक्षण नहीं दिखाया।
जब उनसे उनके राज़ के बारे में पूछा गया, तो राम ने बड़ी सादगी से इसे टाल दिया। उन्होंने कहा कि मिर्च बचपन से ही उनके जीवन का हिस्सा रही है और अब उन्हें तीखापन बिल्कुल नहीं लगता। अपनी बात पर खरे उतरते हुए, उनका पूरा दिन इसी के इर्द-गिर्द घूमता है। सुबह की शुरुआत मिर्च वाली चाय से होती है, दोपहर में मिर्च-मटन करी का आनंद लेते हैं और दिन का अंत कच्ची मिर्च चबाते हुए करते हैं। उनके लिए तीखापन सिर्फ़ स्वाद से बढ़कर है, यह उनकी दवा है, उनकी ताकत है और उनकी पहचान है।
लोकप्रियता बढ़ने के बाद उन्हें परखने के लिए कई कठिन चैलेंज दिए गए। एक शो में तो उन्हें मिर्च के पेस्ट से नहला दिया गया और निजी अंगों पर भी मिर्च लपेटी गई, लेकिन उन्हें किसी प्रकार की तकलीफ नहीं हुई। गांव के लोग बताते हैं कि राम का हर भोजन मिर्च आधारित होता है, चाहे चावल हो, सब्जी हो या मांस। सुबह वे मिर्च वाली चाय पीते हैं, दिन में मिर्च-मटन करी और शाम को कच्ची मिर्च खाते हैं। राम खुद कहते हैं कि मिर्च मेरी दवा है, मुझे कोई बीमारी नहीं होती।
राम ने बताया कि एक बार उनका एक दोस्त उन्हें शिलॉन्ग ले गया था। यहां पर प्रतियोगिता थी। जब यहां प्रतिभागियों ने मुझे इस तरह से मिर्च खाते देखा तो किसी की भी हिम्मत मुझसे कंपीट करने की नहीं हुई। सब घबराकर पीछे हट गए।
राम ने बताया कि वह आसानी से मिर्च खा सकते हैं। वहीं एक किलो अदरक भी आसानी खा लेते हैं। प्याज और लहसुन भी एक किलो तक कच्चा चबा सकते हैं। उन्हें कोई तीखापन नहीं लगता है। अपने काम को लेकर राम ने बताया कि जब वह जवान थे तो अपना ज्यादातर समय गाय चराने और लकड़ियां काटने में बिताते थे। उसी से उनकी आमदनी होती थी। अब वह सुपाड़ी की खेती करते हैं। उन्होंने कहा कि सुपाड़ी की खेती से उन्हें इतनी आमदनी हो जाती है कि वह किसी तरह जीवनयापन कर सकें। राम ने बताया कि वह दुनिया को अपना टैलेंट दिखाना चाहते हैं। वह चाहते हैं कि सरकार उन्हें सपोर्ट करे। वह अपने मिर्च खाने के टैलेंट से दुनिया में नाम रोशन करना चाहते हैं।
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