हरियाणा में रेप पीड़िता नाबालिग ने दिया बेटी को जन्म, घरवालों ने बच्ची को अपनाने से किया इनकार

रोहतक/हरियाणा। हिसार जिला की एक नाबालिग रेप पीड़िता ने पीजीआईएमएस रोहतक में एक बच्ची को जन्म दिया। लेकिन नाबालिग किशोरी के परिजनों ने बच्ची को अपने साथ रखने से इनकार कर दिया। बाद में सहमति से बाल कल्याण समिति के समक्ष बच्ची को सरेंडर कर दिया। समिति ने शनिवार को बच्ची को अपने अधिकार क्षेत्र में लेते हुए विशेष दत्तक ग्रहण एजेंसी चौधरी लखीराम में रखने के आदेश जारी कर दिए। अब संबंधित एजेंसी द्वारा ही बच्ची की देखरेख की जाएगी।
बता दें कि हिसार जिला में एक नाबालिग किशोरी के साथ रेप हुआ था, जिसके बाद वह गर्भवती हो गई। इस संबंध में हिसार में पोक्सो अधिनियम के तहत केस दर्ज हुआ था। बच्ची को पीजीआईएमएस रोहतक में भर्ती कराया गया, जहां उसने एक बच्ची को जन्म दिया। नाबालिग किशोरी के परिजनों ने नवजात बच्ची को अस्वीकार कर दिया। जिला बाल संरक्षण अधिकारी कुलदीप सिंह ने बताया कि मामला समिति के संज्ञान में आया। जिसके बाद किशोरी के परिजनों की सहमति से बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष एडवोकेट सतीश शर्मा, सदस्य उषा चावला व विकास अत्री के समक्ष बच्ची को सरेंडर करने की कार्रवाई पूर्ण करवाई गई। समिति ने बच्ची को अपने अधिकार क्षेत्र में लेते हुए विशेष दत्तक ग्रहण एजेंसी चौधरी लखीराम जगन्नाथ आश्रम में रखने के आदेश जारी कर दिए।
अब संबंधित एजेंसी द्वारा ही बच्ची की देखरेख की जाएगी और समिति ने 60 दिन का समय नाम अनुसार संबंधित परिजनों को दिया है। यदि इस अवधि के दौरान हुए अपनी बच्ची को वापस लेना चाहते हैं, तो आवेदन करके निर्धारित प्रक्रिया के तहत वापस भी ले सकते हैं। 60 दिन पूर्ण होने के पश्चात संबंधित परिजनों का लडक़ी पर कोई भी अधिकार नहीं होगा और बच्ची को गॉड प्रक्रिया में डालते हुए लीगली फ्री फॉर एडॉप्शन घोषित कर दिया जाएगा। गॉड प्रक्रिया में बच्ची को लीगली फ्री फॉर एडॉप्शन घोषित दिया जाता है। जिसका मतलब है कि बच्ची को गोद लेने के लिए कानूनी रूप से स्वतंत्र माना जाता है। इस प्रक्रिया के तहत बच्ची के माता-पिता के साथ सभी कानूनी संबंध समाप्त हो जाते हैं। फिर बच्ची को गोद लेने के लिए पात्र माता-पिता से मिलवाया जाता है।
बच्ची को कानूनी रूप से स्वतंत्र घोषित करने के बाद एक अदालती सत्र में गोद लेने के फैसले को अंतिम रूप दिया जाता है। एक बार गोद लेने की प्रक्रिया पूरी हो जाने पर बच्ची और उसके जैविक माता-पिता के बीच कानूनी संबंध समाप्त हो जाता है। डीसी सचिन गुप्ता का कहना है कि यदि कोई माता-पिता किसी भी कारणवश अपने बच्चों का भरण पोषण करने में असमर्थ है, तो वह जिला विकास भवन के द्वितीय तल पर स्थित बाल कल्याण समिति के कार्यालय में संपर्क कर सकता है। उन्होंने आम नागरिकों से अपील की है कि किसी भी दलाल के बहकावे में न आएं और निर्धारित प्रक्रिया के तहत ही बच्चा गोद लेने की कार्रवाई करें।

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