कानपुर के अधिवक्ता अखिलेश दुबे को न्यायिक अभिरक्षा में भेजा गया जेल, रंगदारी के मामले में हुआ था गिरफ्तार

कानपुर/उत्तर प्रदेश। भाजपा नेता रवि सतीजा से 50 लाख रुपये की रंगदारी मांगने और जान से मारने की धमकी देने में अधिवक्ता अखिलेश दुबे और उसके सहयोगी लवी मिश्रा को गुरुवार को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट सूरज मिश्रा की कोर्ट ने 14 दिन की न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया। अभियोजन की तरफ से संयुक्त निदेशक अभियोजन और जिला शासकीय अधिवक्ता ने बहस की।

गुरुवार को पुलिस ने कड़ी सुरक्षा में कोर्ट में पेश किया गया। पेशी के दौरान कोर्ट परिसर में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था रही। कचहरी परिसर में पेशी के दौरान फोटो खींचने को लेकर पुलिसकर्मियों पर आरोपित झल्ला गए।

अधिवक्ता पर आरोप है कि उन्होंने पहले एक नाबालिग लड़की के नाम पर फर्जी पाक्सो केस दर्ज कराया और फिर उसे खत्म कराने के एवज में सतीजा से भारी रकम की मांग की। रवि सतीजा के मुताबिक, 1 जनवरी 2024 की रात उन्हें व्हाट्सएप कॉल पर जान से मारने की धमकी दी गई और कुछ ही दिन बाद 4 जनवरी को पाक्सो एक्ट के तहत झूठा मुकदमा दर्ज कराया गया।

सीसीटीवी फुटेज और अन्य तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने मामले की गहराई से जांच की, जिसमें यह सिद्ध हो गया कि मामला पूरी तरह से झूठा और पूर्व नियोजित था। नतीजतन, पुलिस ने मुकदमा निरस्त (एक्सपंज) कर दिया। इसके बावजूद धमकियों का सिलसिला थमा नहीं। रवि सतीजा ने बताया कि एक दिन अधिवक्ता ने अपने कार्यालय बुलाकर साफ कहा अगर मुकदमे से बाहर निकलना है तो 50 लाख रुपये देने होंगे।

एफआईआर में रवि सतीजा ने अन्य आरोपितों में विमल यादव, शैलेन्द्र उर्फ टोनू यादव और लवी मिश्रा के नाम भी दिए हैं। सतीजा के अनुसार, 29 फरवरी को विमल यादव ने उन्हें कॉल कर ‘सोना मेंशन’ की छत पर कब्जा दिलाने का दबाव भी डाला।

कोर्ट में सुनवाई के दौरान अधिवक्ता अखिलेश दुबे के खिलाफ दर्ज सात में से रंगदारी और जान से मारने की धमकी की धारा में ही न्यायिक रिमांड दी गई। अभियोजन कोर्ट के कई सवालों का जवाब नहीं दे सका। इस पर कोर्ट ने नाराजगी जताई। कहा कि बिना सबूत और अधूरी तैयारी के बीच आ गए हैं। रिमांड मिलने के बाद दोनों को कड़ी सुरक्षा में जेल भेज दिया।

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