गरीब नारियल पानी वाला करता रहा मिन्नतें… फिर भी महिला अफसर का नहीं पसीजा दिल, लोग कार्रवाई पर उठा रहे सवाल

The poor coconut water seller kept pleading... but still the lady officer's heart did not melt, people are raising questions on the action

लखनऊ/एजेंसी। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में गोमती नगर स्थित डॉ. भीमराव अंबेडकर स्मारक के पास नारियल पानी बेचने वाले एक गरीब युवक पर पॉलिथीन रखने के आरोप में चालान काटने का मामला सोशल मीडिया पर सुर्खियों में है। बुधवार को वायरल हो रहे वीडियो में देखा जा सकता है कि मौके पर मौजूद कई लोग नारियल पानी वाले के पक्ष में मिन्नतें करते दिख रहे हैं और अधिकारियों से गुहार लगा रहे हैं कि गरीब को माफ कर दिया जाए, लेकिन मौके पर मौजूद महिला अधिकारी (जिन्हें लोग वीडियो में ‘मैम’ कहकर संबोधित कर रहे हैं) उनका दिल नहीं पसीजा। महिला अफसर ने किसी की एक न सुनी और नारियल पानी विक्रेता का चालान कर ही दिया।
इस पूरी घटना को लेकर लोगों में नाराजगी है। लोगों का कहना है कि प्रशासन गरीब ठेले वालों और फुटपाथ पर सामान बेचने वालों पर तो कड़ी कार्रवाई करता है, लेकिन शहर के बड़े दुकानदार जो खुलेआम पॉलिथीन का इस्तेमाल कर रहे हैं, उनके खिलाफ कार्रवाई शायद ही कभी देखने को मिलती है। वायरल वीडियो में एक व्यक्ति कहते सुना गया कि हम सब जानते हैं कि पॉलिथीन पर रोक है, लेकिन क्या सिर्फ गरीबों पर ही कानून लागू होता है?
इस मामले में सोशल मीडिया पर लोगों की प्रतिक्रियाएं तीखी हैं। कई यूजर्स ने सवाल उठाया कि क्या यही है समान कानून का पालन? एक यूजर ने लिखा है कि छोटे गरीब विक्रेता को तंग करना आसान है, क्योंकि वो बिना विरोध किए सब सह लेता है, पर बड़े दुकानदारों को कोई हाथ नहीं लगाता। वहीं, कुछ लोगों ने संबंधित अधिकारी के रवैये को अमानवीय बताया और प्रशासन से मामले में संवेदनशीलता दिखाने की अपील की। हालांकि, सोशल मीडिया पर कुछ लोग प्रशासन का तर्क यह रहा है कि पॉलिथीन पर रोक सभी के लिए है और नियम का पालन जरूरी है।
यह मामला सिर्फ एक नारियल पानी विक्रेता पर कार्रवाई का नहीं है, बल्कि यह प्रशासनिक रवैये और नीति के जमीनी क्रियान्वयन पर सवाल उठाता है, क्योंकि पॉलिथीन जैसे पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाले उत्पादों पर रोक जरूरी है, लेकिन यह रोक सबके लिए बराबर होनी चाहिए। गरीबों को कानून का सबसे आसान निशाना बनाना न सिर्फ अन्याय है, बल्कि समाज में असमानता की सोच को भी बढ़ावा देता है। लोगों का यह भी कहना है कि अधिकारी खुद अपनी जिम्मेदारी सही ढंग से नहीं निभाते है, जबकि सरकार की मंशा है कि पूरी तरीके से इस पर रोक लगाई जाए तो बिना किसी भेदभाव के अभियान चलाकर सख्ती से इसका पालन कराया जाए।
बता दें कि उत्तर प्रदेश सरकार ने प्लास्टिक प्रदूषण को रोकने के लिए 50 माइक्रोन से कम मोटाई वाली प्लास्टिक पॉलिथीन पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया हुआ है। वर्ष 2018 में केंद्र सरकार के निर्देशों के तहत राज्य सरकार ने इस प्रतिबंध को सख्ती से लागू करने के आदेश दिए थे। इसके बाद 2022 में सिंगल यूज प्लास्टिक (Single Use Plastic) जैसे चम्मच, कप, प्लेट, स्ट्रॉ, पॉलिथीन बैग आदि पर भी रोक लगा दी गई। इसके उल्लंघन पर 1,000 रुपये से लेकर 1,00,000 तक का जुर्माना या कारावास का प्रावधान है। सरकारी दस्तावेजों में यह भी साफ है कि यह नियम सभी दुकानदारों, विक्रेताओं, होटल-रेस्टोरेंट, बाजारों और फेरीवालों पर समान रूप से लागू होता है। बावजूद इसके, ग्राउंड रियलिटी यह दर्शाती है कि कार्रवाई का सबसे आसान निशाना अक्सर छोटे विक्रेता और गरीब तबके के लोग बनते हैं।

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