शाहजहांपुर में सीबीआई चीफ और सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस बनकर किया डिजिटल अरेस्ट, 7 लोग गिरफ्तार
In Shahjahanpur, a person posing as CBI chief and Supreme Court Chief Justice conducted a digital arrest, 7 people arrested

शाहजहांपुर/उत्तर प्रदेश। शाहजहांपुर के चौक कोतवाली क्षेत्र के निवासी शरदचंद्र को 6 मई को 2 करोड़ 80 लाख रुपये के घोटाले का आरोप लगाकर डिजिटल अरेस्ट किया गया था। ठगों ने खुद को सीबीआई चीफ और सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस बताकर शरदचंद्र को 15 जून तक डिजिटल अरेस्ट में रखा। इस दौरान जमानत और केस खत्म करने के नाम पर उनसे 1 करोड़ 4 लाख 47 हजार रुपये ठग लिए गए। इस मामले में एफआईआर दर्ज की गई थी।
एसपी राजेश द्विवेदी ने मामले के खुलासे के लिए एक विशेष जांच टीम (एसआईटी) गठित की। टीम ने उस बैंक खाते को ट्रेस किया, जिसमें ठगी की राशि ट्रांसफर की गई थी। जांच में पता चला कि 71 लाख रुपये एक हैदराबाद के कॉर्पोरेट अकाउंट में ट्रांसफर किए गए थे। इस अकाउंट से उसी समय 3 करोड़ रुपये का लेन-देन भी हुआ था। अकाउंट होल्डर ने अपने खाते के दुरुपयोग का आरोप लगाकर पहले ही एफआईआर दर्ज कराई थी।
पुलिस ने इस साइबर ठगी गिरोह के सात आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इनमें झांसी के सुनील अहिरवार, आगरा के प्रशांत कटारा, दिल्ली के गौतम सिंह, हाथरस के संदीप कुमार, हरियाणा के सैय्यद सैफ, गाजियाबाद के आर्यन शर्मा और मध्य प्रदेश के पवन कुमार यादव शामिल हैं। गौतम सिंह ने एमबीए किया है, और अन्य आरोपी भी पढ़े-लिखे हैं।
पुलिस के अनुसार, इस मामले में डिजिटल अरेस्ट और फिनटैंक साइबर फ्रॉड का इस्तेमाल किया गया। फिनटैंक फ्रॉड टीम कमीशन के आधार पर सोशल मीडिया के जरिए कॉर्पोरेट करेंट अकाउंट्स को चिन्हित करती है। डिजिटल अरेस्ट के बाद पीड़ित का पैसा फेस-टू-फेस मीटिंग के जरिए इन अकाउंट्स में ट्रांसफर किया जाता है। इसके बाद कैश मैनेजमेंट सिस्टम के जरिए राशि को विभिन्न लाभार्थी खातों में बांटा जाता है। अंत में, यह राशि सेविंग अकाउंट्स से क्रिप्टोकरेंसी में बदलकर क्रिप्टो वॉलेट में भेज दी जाती है।
आरोपियों ने शरदचंद्र से ठगे गए 1 करोड़ 4 लाख 47 हजार रुपये को चार अलग-अलग खातों में ट्रांसफर किया। फिनटैंक फ्रॉड टीम ने इस राशि को 9 लेयर्स में 40 बैंक खातों में बांटा। पुलिस का दावा है कि यह गिरोह अब तक 9 करोड़ रुपये की ठगी कर चुका है।
एसपी राजेश द्विवेदी ने बताया कि जिन बैंक खातों में ठगी की राशि ट्रांसफर की गई, उनकी भूमिका की भी जांच की जाएगी। इतनी बड़ी राशि के लेन-देन पर बैंकों को निगरानी रखनी चाहिए। मुख्य आरोपियों की तलाश जारी है, और पुलिस इस साइबर ठगी नेटवर्क को पूरी तरह से उजागर करने के लिए प्रतिबद्ध है।



