बिकरू कांड के आरोपी पूर्व जिला पंचायत सदस्य गुड्डन त्रिवेदी समेत तीन को हाईकोर्ट से मिली जमानत

विकास दुबे का था राइट हैंड

कानपुर/उत्तर प्रदेश। यूपी के कानपुर में आज भी बिकरू कांड की यादें ताजा हैं। दुर्दांत अपराधी विकास दुबे ने अपने गुर्गों के साथ मिलकर सीओ समेत आठ पुलिसकर्मियों की बेरहमी से हत्या कर दी थी। इस मामले में पूर्व जिला पंचायत सदस्य अरविंद उर्फ गुड्डन त्रिवेदी समेत तीन आरोपियों की जमानत हाईकोर्ट ने मंजूर हो गई है। गुड्डन त्रिवेदी और उसके ड्राइवर सुशील तिवारी को एटीएस ने मुंबई से गिरफ्तार किया था।
कुख्यात अपराधी विकास दुबे ने बीते 02 जुलाई 2020 की रात अपने गुर्गों के साथ मिलकर सीओ समेत आठ पुलिस कर्मियों की हत्या कर दी थी। बिकरू कांड के बाद यूपी एसटीएफ ने विकास दुबे समेत 6 बदमाशों को एनकांउटर में मार गिराया था। इस मामले में 36 आरोपी जेल में बंद हैं। बिकरू कांड के बाद पुलिस प्रशासन ने विकास दुबे की कोठी पर बुलडोजर चला कर खंडहर में तब्दील कर दिया था। इसके साथ ही उसकी लग्जरी गाड़ियों और ट्रैक्टर को भी बर्बाद कर दिया गया था।
पुलिस ने बिकरू कांड में विकास दुबे के राइट हैंड पूर्व जिला पंचायत सदस्य गुड्डन त्रिवेदी, उसके ड्राइवर सुशील तिवारी और अखिलेश शुक्ल उर्फ छोटू को आरोपी बनाया था। वारदात के बाद आरोपी फरार हो गए थे। एटीएस टीम ने गुड्डन और सुशील को मुंबई से गिरफ्तार किया था। वहीं, अखिलेश शुक्ल को उसके गांव से गिरफ्तार किया था।
कानपुर देहात से जिला पंचायत सदस्य गुड्डन त्रिवेदी को पर्दे के पीछे रहकर वारदातों को अंजाम देने में महारत हासिल थी। गुड्डन हर काम को सोची-समझी रणनीति के तहत ही करता था। ऐसा ही कुछ बिकरू हत्या कांड में भी किया था। इस बात को सभी जानते हैं कि गुड्डन और विकास एक ही सिक्के के दो पहलू थे। दोनों में फर्क सिर्फ इतना था कि विकास गुस्से और खुन्नस में आकर काम करता था और गुड्डन शांत होकर सोच समझकर किसी घटना को अंजाम देता था।
पूर्व जिला पंचायत सदस्य गुड्डन त्रिवेदी उर्फ अरविंद को बिकरू गांव हत्याकांड के बाद महाराष्ट्र एटीएस ने उसके ड्राइवर सुशील के साथ गिरफ्तार किया था। कानपुर पुलिस ने पहले तो गुड्डन त्रिवेदी को इस हत्याकांड में शामिल होने से इनकार किया था। इसके बाद कानपुर पुलिस ने गुड्डन त्रिवेदी से पूछताछ के लिए ट्रांजिट रिमांड पर लाने का फैसला किया था। गुड्डन ने बिकरू हत्याकांड के लिए विकास को असलहे और कारतूस मुहैया कराए थे। यह बात किसी से छिपी नहीं थी। टांजिड रिमांड में जब पुलिस गुड्डन को कानपुर लाई थी। सिर्फ रात में ही पूछताछ करने के बाद अगले दिन सुबह ही उसे जेल भेज दिया था, लेकिन पुलिस उससे यह नहीं उगलवा सकी कि बदमाशों द्वारा इस्तेमाल किए गए असलहे कहा छिपाए गए थे।
गुड्डन त्रिवेदी के सभी राजनीतिक पाटिर्यों के नेताओं से अच्छे संबंध थे। बिकरू गांव हत्या कांड में कई सफेदपोश नेताओं के साथ उसकी फोटो भी वायरल हुई थी। इसके साथ ही कानपुर देहात के पुलिस महकमे से लेकर जिला प्रशासन के अधिकारियों से भी संबंध थे। माती जेल में भी लोग भलीभांति जानते थे। माती जेल उसके लिए किसी आरामगाह से कम नहीं थी।
गुड्डन त्रिवेदी एक ऐसा नाम है, जिस कानपुर देहात का शायद ही ऐसा कोई शख्स हो जो उसे जानता न हो। असलहों के साथ फोटो खिचाना बहुत पसंद है। उसका यही शौक पहचान का कारण था। इसके साथ आपराधिक प्रवृत्ति के लोगों को संरक्षण देता है, इसके बाद उनसे अपने काम निकलवाना उसे बखूबी आता था। कोई अपराधी उसकी बात नहीं काटता था।
महाराष्ट्र में अचानक से पकड़ा गया गुड्डन त्रिवेदी
फरारी के दौरान विकास दुबे भाग कर मध्य प्रदेश पहुंचा था, और गुड्डन त्रिवेदी महाराष्ट्र। हिस्ट्रीशीटर विकास दुबे मध्य प्रदेश के उज्जैन मंदिर से गिरफ्तार किया था। विकास के एनकांटर के बाद अचानक से खबर आती है कि महाराष्ट्र से एटीएस ने गुड्डन त्रिवेदी को गिरफ्तार कर लिया है। विकास दुबे के एनकाउंटर के बाद उसे शक था कि यदि ज्यादा दिन फरारी काटी तो विकास की तरह कहीं उसका भी एंकाउटर न हो जाए। ट्रांजिड रिमांड के दौरान उसने प्लेन से कानपुर आने की जाने की अपील की थी। इसके बाद कानपुर पुलिस उसे एयर लिफ्ट कराकर कानपुर पहुंची थी।
बिकरू कांड के आरोपियों ने हाईकोर्ट में जमानत याचिका दाखिल की थी। बचाव पक्ष के अधिवक्ता एलएम सिंह के मुताबिक, तीनों आरोपी 4 साल 10 महीने से जेल में बंद हैं। मामले में लगभग 102 गवाह हैं, जिसमें से अभी तक मात्र 13 गवाहों के बयान दर्ज हुए हैं। गवाहों ने तीनों आरोपियों के खिलाफ किसी तरह का बयान नहीं दिया है। अधिवक्ता ने बताया कि घटना के दौरान आरोपी मौके पर नहीं थे। इसके बाद अदालत ने तीनों आरोपियों की जमानत याचिका मंजूर कर ली।

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