ई-कॉमर्स कंपनियों पर प्रॉडक्ट बिकवाने का झांसा देकर ठगी का भांडाफोड़, नोएडा पुलिस ने 21 को किया गिरफ्तार

Noida Police arrested 21 people for cheating people by promising to sell products on e-commerce companies

नोएडा। ई-कॉमर्स कंपनियों के सेलिंग वाले प्लेटफॉर्म पर प्रॉडक्ट बिकवाने का झांसा देकर ठगी करने वाले एक कॉलसेंटर का भांडाफोड़ हुआ है। सेक्टर-63 थाना पुलिस ने इसके संचालक समेत 21 लोगों को गिरफ्तार किया है। इनमें 5 महिलाएं भी हैं। पुलिस के मुताबिक आरोपियों ने एक एजेंसी बनाई हुई थी।आरोपी सोशल मीडिया और विभिन्न माध्यम से यह प्रचार-प्रसार करते थे। ये लोगों को झांसा देते थे कि अगर कोई स्टार्टअप या छोटी कंपनी अपने प्रॉडक्ट को ई-कॉमर्स कंपनियों के प्लेटफॉर्म पर बेचना चाहती है तो यह काम उनकी कंपनी करवाएगी। फिर दिए गए नंबर पर जब लोग संपर्क करते थे तो कंपनी को कई ई-कॉमर्स कंपनियों का सहयोगी बताकर सर्टिफिकेट जारी करने का दावा किया जाता था। इससे आगे रुपये ट्रांसफर करवाकर फर्जी सर्टिफिकेट भेज देते थे। इस स्टेप्स के बाद अन्य सर्विस के नाम पर जालसाज रुपये ठगते थे। ये लोग दूर के राज्यों में रहने वालों को निशाना बनाते थे ताकि वो इतनी जल्दी नोएडा शिकायत लेकर न आ पाएं।
डीसीपी नोएडा शक्ति मोहन अवस्थी ने बताया कि सेक्टर-63 थाने में बनी साइबर हेल्प डेस्क पर कुछ शिकायतें आई थीं। शिकायत लेकर आने वाले पीड़ितों ने बताया था कि रुपये लेकर उनको जारी किए गए सर्टिफिकेट किसी काम नहीं आ रहे हैं। इसके बाद पुलिस ने ई-कॉमर्स कंपनियों से संपर्क किया तो कंपनियों ने इस प्रकार का कोई भी सर्टिफिकेट जारी करने से इनकार किया।
यही नहीं, ई-कॉमर्स कंपनियों ने इस कंपनी के अपना अधिकृत पार्टनर होने से भी इनकार किया। इसके बाद पुलिस ने इन्फोबीम सॉल्यूशंस नाम की इस कंपनी में जाकर जांच की। यहां पूछताछ और जांच के बाद फर्जीवाड़े का पता चला। पकड़े गए आरोपियों की पहचान जोगेंद्र कुमार, हिमांशु शर्मा, गोपाल सक्सेना, रेयांश शर्मा, अखिल गर्ग, निशांत, रवि कुमार, सरस भारद्वाज, अनिल कुमार, कार्तिक मिश्रा, आकाश यादव, पंकज उपाध्याय, लोकेश चौधरी, प्रदीप कुमार, मुकुल त्यागी, आकाश शर्मा, स्वीटी, मोनिका वर्मा, गुंजन चौहान, पूर्ति, गुंजन के रूप में हुई। इनके कब्जे से 12 डेस्कटॉप सिस्टम, बरामद किए गए। कंपनी में चार डायरेक्टर बने हुए थे। बाकी कॉल करने वालों को टारगेट के हिसाब से पैसा मिलता था। कुछ लोगों को वेतन के आधार पर भी रखा गया था।
पुलिस की जांच में सामने आया है कि लोगों को दिए जाने वाले फर्जी सर्टिफिकेट एजेंसी के डायरेक्टर जोगेंद्र निवासी साउथ दिल्ली, गुंजन कात्याल निवासी प्रीत विहार दिल्ली व आकाश शर्मा निवासी साहिबाबाद तैयार कर कर्मचारियों को देते थे। यह तीनों कंपनी के डायरेक्टर थे। इसके बाद कर्मचारी कॉल कर, सोशल मीडिया के जरिए विक्रेताओं को प्रलोभित कर उनको जाल में फंसाते थे। आखिर में सर्टिफिकेट देकर उनसे रुपये ले लिए जाते थे। पुलिस का अनुमान है कि अब तक इस रैकेट ने 150 से ज्यादा लोगों से 5 करोड़ रुपये से ज्यादा की ठगी की है। डीसीपी ने बताया कि आरोपियों का क्राइम रेकॉर्ड पता किया जा रहा है।

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