मिर्जापुर में गुमनाम जिंदगी जीने को मजबूर पद्म विभूषण पंडित छन्नूलाल मिश्र, प्रशासन से लगाई न्याय की गुहार
Padma Vibhushan Pandit Chhannulal Mishra forced to live an anonymous life in Mirzapur, appeals to the administration for justice

मिर्जापुर/उत्तर प्रदेश। भारतीय शास्त्रीय संगीत के दिग्गज और पद्म विभूषण से सम्मानित पंडित छन्नूलाल मिश्र (88) इन दिनों मिर्जापुर में गुमनामी का जीवन जी रहे हैं। वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चुनाव में प्रस्तावक भी रहे हैं, अपने बेटे, पोते और बेटी की प्रताड़ना से तंग आकर, वे पिछले दो वर्षों से मिर्जापुर में अपनी दूसरी बेटी के घर रहने को विवश हैं।
छन्नूलाल मिश्र ने बताया कि बनारस में अपने परिवार की प्रताड़ना से तंग आकर मिर्जापुर में शरण ली है, परंतु यहां भी वे लोग उनका पीछा नहीं छोड़ रहे हैं। उनकी बेटी ने बताया कि वाराणसी में रहते समय उनके परिवार के सदस्यों ने उनके बैंक खातों से लाखों रुपये का गबन किया।
छन्नूलाल मिश्र का कहना है कि वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी औ र मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिलकर अपनी समस्या साझा करना चाहते हैं, लेकिन अभी तक उन्हें कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली है। उन्होंने प्रशासन से अपील की है कि उनके साथ हो रहे अन्याय को रोका जाए और उन्हें चिकित्सकीय सेवा मुहैया कराई जाए।
88 वर्षीय पंडित मिश्र ने दुख व्यक्त किया कि जहां अधिकांश लोग अपना अंतिम समय बनारस में बिताना चाहते हैं, वहीं वे मिर्जापुर में अपनी बेटी के घर रहने को मजबूर हैं। उनकी हार्दिक इच्छा है कि वे बनारस में रहें, लेकिन पारिवारिक समस्या के कारण उन्हें मिर्जापुर में रहना पड़ रहा है।
उनकी बेटी ने बताया कि वह 19 वर्षों तक मथुरा में नौकरी कर रही थीं, लेकिन पिताजी की प्रताड़ना से परेशान होकर मिर्जापुर में कम पद पर जॉइन कर लिया है। अब वे अपने पिताजी के साथ रह रही हैं और उनके साथ हो रहे अन्याय के खिलाफ प्रशासन से मदद की गुहार लगा रही हैं। पंडित छन्नूलाल मिश्र ने प्रशासन से अपील की है कि उन्हें न्याय दिलाया जाए और उनकी खोई हुई प्रतिष्ठा वापस दिलाने में सहायता की जाए।




