एक रूम में पढ़ते हैं 5 कक्षाओं के 70 बच्चे, 90 साल पुरानी जर्जर इमारत में चलता है मिर्जापुर का सरकारी स्कूल

मिर्जापुर/उत्तर प्रदेश। देश को आजाद हुए 76 साल बीत गए। साइकिल से शुरू हुआ सफर आज चंद्रमा तक पहुंच गया है। शिक्षा का बजट लाखों से करोड़ों में पहुंच गया, लेकिन जमीन पर तस्वीर नही बदली। आज भी कुछ सरकारी स्कूल के हाल वैसे ही है, जैसे आजादी से पहले हुआ करता था। उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर में भवन न होने पर एक ही क्लासरूम में पांच कक्षाएं संचालित की जाती हैं। पांचों क्लास के बच्चे एक ही रूम में बैठकर पढ़ते हैं। नए भवन के बगल में स्थित पुराना भवन जर्जर हो गया है। भवन जर्जर होने के बाद एक ही रूम में 5 कक्षा के बच्चे बैठकर पढ़ाई कर रहे हैं।
मिर्जापुर जिला मुख्यालय से महज 15 किलोमीटर दूर छानबे ब्लॉक के उत्तर देवरी में शिक्षा का केन्द्र बदहाली के आंसू रो रहा है। सन 1934 में स्थापित भवन की हालत जर्जर हो गई है। छत पूरी तरह से टूटा गई है। जो लकड़ी लगी हुई है, उसमें दीमक लगी हुई है। कुछ वर्ष पूर्व बनाये गए एक नए भवन में 1 से लेकर 5 कक्षा संचालित हो रही हैं।
प्राथमिक स्कूल में कुल 70 विद्यार्थी पंजीकृत हैं। इसमें 44 छात्राएं हैं। तीन अध्यापक की नियुक्ति इनको पढ़ाने के लिए की गई है। कई बार अधिकारियों ने विद्यालय का निरीक्षण किया, लेकिन लगता है कि इस बदहाली पर उनकी नजर नही पड़ी। प्रधानाध्यापक का कक्ष जर्जर भवन में संचालित होता है। बारिश के दिनों में उनके कक्ष में सिर पर पानी टपकता है। शिक्षा व्यवस्था बेहतर बताई जाती है, लेकिन यह सिर्फ कागज़ों में ही सीमित है। जमीनी तस्वीर बिल्कुल ही अलग है।
जर्जर भवन के जोखिम से बचाने के लिए एक ही क्लास रूम में पूरे स्कूल संचालन होता है। क्लास रूम की स्थिति ऐसी है कि अगर एक साथ पूरे बच्चे पढ़ने के लिए आ जाएं तो ठीक तरह से बैठ भी नहीं पाएंगे। ऐसी स्थिति में बच्चे क्या पढेंगे और क्या सीखेंगे? प्रधानाध्यापक साक्षी पाण्डेय ने बताया कि एक ही कक्ष में सभी कक्षा संचालित होने से अन्य बहुत सारी गतिविधियां नहीं हो पाती हैं। बच्चे काफी शोर करते हैं। बच्चों को निपुण बनाने का टारगेट भी पूर्ण नही हो रहा है।
जिले के बेसिक शिक्षा अधिकारी अनिल कुमार वर्मा पहले इसपर बोलने से बचते हुए दिखाई दिए। फिर उन्होंने बात की और कहा कि उत्तर देवरी प्राथमिक विद्यालय का मामला संज्ञान में है। दो नए क्लासरूम के निर्माण के लिए शासन से स्वीकृति मिल गई है। दस दिन के अंदर निर्माण कार्य शुरु कराया जाएगा।




