केरल में इस्लामी संस्थान के संस्कृत पाठ्यक्रम में भगवद् गीता अन्य हिंदू ग्रंथ शामिल

त्रिशूर,(केरल)। त्रिशूर जिले के एक इस्लामी संस्थान ने अपने छात्रों के लिये तैयार किए गए ढांचागत पाठ्यक्रम में कक्षा 11 और 12 में मूल संस्कृत व्याकरण और फिर ‘देव भाषा’ में भगवद् गीता के साथ-साथ अन्य हिंदू ग्रंथों को अध्ययन के लिए शामिल किया है। नया शैक्षणिक वर्ष शुरू होने पर जून 2023 से नया पाठ्यक्रम लागू होगा। मलिक दीनार इस्लामिक कॉम्प्लेक्स (एमआईसी) द्वारा संचालित ‘द एकेडमी ऑफ शरिया एंड एडवांस स्टडीज’ (एएसएएस) हाल ही में हिंदू विद्वानों की मदद से अपने छात्रों को संस्कृत, जिसे ‘देव भाषा’ के रूप में भी जाना जाता है, पढ़ाकर एक मिसाल पेश करने के लिए चर्चा में थी।

संस्थान ने कहा कि प्राचीन और शास्त्रीय को पढ़ाने के लिए एक संरचित पाठ्यक्रम के साथ आने का निर्णय छात्रों में अन्य धर्मों के बारे में ज्ञान और जागरूकता पैदा करने के लिए लिया गया था। एमआईसी एएसएएस पिछले सात वर्षों से अपने छात्रों को भगवद् गीता, उपनिषद, महाभारत, रामायण के चुनिंदा अंशों को संस्कृत में पढ़ा रहा है। संस्थान के समन्वयकों में से एक हाफिज अबूबकर ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि पहले का संस्कृत पाठ्यक्रम बहुत विस्तृत नहीं था। उन्होंने कहा कि अब आठ साल के पाठ्यक्रम के लिए एक सिलेबस है जो 12वीं से स्नातकोत्तर तक चलता है।

अबूबकर ने कहा कि छात्रों के पास अब संस्कृत में डिग्री या स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम चुनने का भी विकल्प होगा। उन्होंने कहा कि विचार सिर्फ उन्हें एक सिखाने का नहीं था, बल्कि छात्रों को इन प्राचीन हिंदू ग्रंथों से परिचित कराने का भी था ताकि वे धर्म को समझ सकें और अपने लिए सुविज्ञ निर्णय ले सकें। उन्होंने कहा, “यह छात्रों के बीच धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक विचारों को प्रोत्साहित करने में भी मदद करेगा।” संस्थान मुख्य रूप से एक शरिया कॉलेज है जहां उर्दू और अंग्रेजी जैसी अन्य भाषाओं के साथ ही कला में स्नातक पाठ्यक्रम की भी पढ़ाई होती है और यह कालीकट विश्वविद्यालय से संबद्ध है।

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